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अवैध महुआ शराब ने लिया कुटीर उद्योग का रूप, नशीली शराब से कम उम्र की महिलाएं हो रही हैं विधवा

कोडरमा: सतगावां थाना क्षेत्र में अवैध महुआ शराब का कारोबार कुटीर उद्योग का रूप ले चुका है। गया-देवघर मुख्य मार्ग के किनारे बसे बासोडीह, समलडीह, बरियारडीह और बाजार क्षेत्रों में खुलेआम अवैध महुआ शराब बेची जा रही है। आरोप है कि उत्पाद विभाग और प्रशासनिक अधिकारी इस गोरखधंधे को देखकर भी अनदेखा कर रहे हैं। प्रत्येक दिन नशे की हालत में लोग सड़क किनारे गिरे पड़े नजर आते हैं।

बासोडीह, समलडीह, बरियारडीह, खुट्टा, असनाकोनी, कटैया, मीरगंज, बजनियां, राजाबर, कानीकेंद्र, अंगार, माधोपुर और धर्मपुर जैसे क्षेत्र अवैध महुआ शराब निर्माण के प्रमुख केंद्र बन चुके हैं। यहां शराब की भट्टियां तथा अवैध कारोबार में संलिप्त पुरुष और महिलाएं आसानी से देखे जा सकते हैं। प्रतिदिन दर्जनों गांवों के सैकड़ों घरों में हजारों लीटर शराब तैयार की जाती है और सफेद पाउच में भरकर सुनियोजित वितरण व्यवस्था के तहत उसकी बिक्री की जाती है।

अवैध महुआ शराब की बिक्री वाले अड्डों पर सुबह पांच बजे से रात दस बजे तक नशेड़ियों का आना-जाना लगा रहता है। इन्हीं रास्तों से स्कूली बच्चे भी पढ़ने के लिए गुजरते हैं, जिससे उन्हें इस तरह के माहौल का सामना करना पड़ता है।

अवैध महुआ शराब के सेवन से लोगों के स्वास्थ्य पर भी गंभीर असर पड़ रहा है। इसका सबसे अधिक दुष्प्रभाव उन परिवारों पर पड़ रहा है, जहां कम उम्र की महिलाओं के विधवा होने के मामले सामने आ रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस अवैध कारोबार के खिलाफ कोई खुलकर बोलने की हिम्मत नहीं करता, क्योंकि लोग डरे और सहमे रहते हैं।

स्थानीय लोगों के अनुसार, अवैध शराब में कई हानिकारक पदार्थ मिलाए जाते हैं, जो मानव जीवन के लिए बेहद खतरनाक हैं। इसके सेवन से लोगों का स्वास्थ्य तेजी से बिगड़ता है और कई लोग असमय काल के गाल में समा जाते हैं। लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि इस अवैध शराब कारोबार पर जल्द अंकुश नहीं लगाया गया, तो आने वाले समय में स्थिति और भी भयावह हो सकती है।

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