चाईबासा: पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा ने बंद पड़ी लौह अयस्क खदानों, बढ़ती बेरोजगारी और पलायन को लेकर झारखंड सरकार पर निशाना साधा है।
उन्होंने कहा कि चुनाव के समय माइंस खुलवाने, स्थानीय युवाओं को रोजगार देने और जल-जंगल-जमीन पर आदिवासी-मूलवासी अधिकार की बातें की जाती हैं, लेकिन चुनाव खत्म होने के बाद जनता को उसके हाल पर छोड़ दिया जाता है।
मधु कोड़ा ने कहा कि बड़ाजामदा, नोवामुंडी, गुवा, किरीबुरू समेत पूरे खनन क्षेत्र के हजारों युवा बेरोजगारी और पलायन की समस्या झेल रहे हैं।
उन्होंने कहा कि अब अखबारों और मीडिया के माध्यम से जनता की पीड़ा खुलकर सामने आ रही है। क्षेत्र के लोग रोजगार, व्यापार और आजीविका के संकट से परेशान हैं।
उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों की बेरुखी और निष्क्रियता के कारण जनता अपनी आवाज उठाने के लिए मीडिया का सहारा लेने को मजबूर हो गई है। यह सरकार और स्थानीय जनप्रतिनिधियों की विफलता का प्रमाण है।
मधु कोड़ा ने कहा कि कुछ जनप्रतिनिधि केवल जनता को बरगलाकर चुनाव जीत रहे हैं, अन्यथा 20 से अधिक माइंस वर्षों से बंद नहीं रहतीं। खदान बंद होने से छोटे दुकानदार, ट्रांसपोर्टर, होटल व्यवसायी, मजदूर और ग्रामीण परिवार आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं, लेकिन सरकार केवल बयानबाजी में व्यस्त है।
उन्होंने कहा कि हाल के दिनों में गुवा क्षेत्र में सेल प्रबंधन के खिलाफ हुए जनआंदोलन ने यह साबित कर दिया कि जब जनता संगठित होती है तो सरकार और प्रबंधन दोनों को झुकना पड़ता है। यदि सरकार जल्द माइंस शुरू कराने, स्थानीय युवाओं को रोजगार देने और प्रभावित परिवारों के लिए ठोस नीति नहीं बनाती है, तो जनता के सहयोग से व्यापक आंदोलन किया जाएगा।
मधु कोड़ा ने कहा कि अब जनता केवल आश्वासन नहीं, बल्कि ठोस कार्रवाई चाहती है। सरकार को जनता के सवालों का जवाब देना होगा और उनकी मांगों को पूरा करना होगा।

