जमशेदपुर: बिष्टुपुर स्थित डीडी बार के चर्चित हत्याकांड और कातिलाना हमले के मुख्य आरोपी विश्वनाथ मंडल उर्फ बोदरा ने बुधवार को पुलिस को चकमा देते हुए जमशेदपुर व्यवहार न्यायालय में आत्मसमर्पण कर दिया। पुलिस लंबे समय से उसकी तलाश में जुटी थी और उसकी गिरफ्तारी पर दो लाख रुपये का इनाम भी घोषित किया गया था। बावजूद इसके आरोपी पुलिस के हाथ नहीं लगा और सीधे अदालत पहुंचकर सरेंडर करने में सफल रहा।
जानकारी के अनुसार, दोपहर करीब 3:30 बजे विश्वनाथ मंडल एक अधिवक्ता के साथ जमशेदपुर कोर्ट परिसर पहुंचा और मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (सीजेएम) न्यायालय में आत्मसमर्पण कर दिया। बाद में उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। अब पुलिस उसे पूछताछ के लिए रिमांड पर लेने की तैयारी करेगी ताकि घटना से जुड़े अन्य पहलुओं का खुलासा किया जा सके।
विश्वनाथ मंडल के सरेंडर के बाद एक बार फिर जमशेदपुर पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठने लगे हैं। पिछले कई दिनों से पुलिस की विशेष अनुसंधान टीम (एसआईटी) उसकी गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी कर रही थी। शहर से बाहर और आसपास के जिलों में भी उसकी तलाश की जा रही थी, लेकिन वह पुलिस की नजर से बचते हुए अदालत पहुंच गया। इससे यह सवाल उठ रहा है कि आखिर इतनी कड़ी निगरानी के बावजूद पुलिस को उसके कोर्ट पहुंचने की भनक तक कैसे नहीं लगी।
गौरतलब है कि 27 जून की रात बिष्टुपुर स्थित डीडी बार के बाहर पुलिस की मौजूदगी के बीच दो युवकों पर जानलेवा हमला किया गया था। आरोप है कि पुलिस वाहन से नीचे उतारकर हिमांशु सिंह और प्रत्युष आनंद पर धारदार हथियार से ताबड़तोड़ हमला किया गया। गंभीर रूप से घायल हिमांशु सिंह की इलाज के दौरान मौत हो गई, जबकि प्रत्युष आनंद अब भी गंभीर हालत में उपचाराधीन है। इस घटना ने पूरे शहर में सनसनी फैला दी थी और कानून-व्यवस्था को लेकर भी कई सवाल खड़े हुए थे।
जांच में सामने आया कि इस हमले का मुख्य आरोपी विश्वनाथ मंडल उर्फ बोदरा था, जिसकी गिरफ्तारी पुलिस के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई थी। उसकी तलाश में एसआईटी लगातार कार्रवाई कर रही थी और पुलिस ने उस पर दो लाख रुपये का इनाम भी घोषित किया था।
इस मामले में बिष्टुपुर थाना में कुल 10 नामजद समेत अन्य अज्ञात आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई थी। पुलिस अब तक कई आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है। इनमें बार के मैनेजर विजय महानंद, बार मालिक नीरज सिंह सहित अन्य आरोपी शामिल हैं। एक नाबालिग को भी विधि के अनुसार निरुद्ध किया गया है। मुख्य आरोपी के आत्मसमर्पण के बाद अब पुलिस को उम्मीद है कि रिमांड के दौरान पूछताछ में घटना की पूरी साजिश, हमले के कारण और अन्य आरोपियों की भूमिका से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं।

