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*टाटा एआईजी इंश्योरेंस को उपभोक्ता आयोग का झटका, गलत तरीके से बीमा दावा खारिज करना सेवा में कमी*

चाईबासा: जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग, पश्चिमी सिंहभूम, चाईबासा ने स्वास्थ्य बीमा का दावा अनुचित तरीके से खारिज करने के मामले में टाटा एआईजी जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड को सेवा में कमी का दोषी माना है। आयोग के अध्यक्ष सुनील कुमार सिंह ने कंपनी को शिकायतकर्ता देवाशीष दत्ता को 45 हजार रुपये तक चिकित्सा खर्च, 10 हजार रुपये मानसिक परेशानी और 5 हजार रुपये मुकदमा खर्च देने का आदेश दिया है।

मामले के अनुसार, चाईबासा के यूरोपियन क्वार्टर निवासी देवाशीष दत्ता ने एक्सिस बैंक, जमशेदपुर शाखा के माध्यम से अपने परिवार के लिए पांच लाख रुपये का स्वास्थ्य बीमा कराया था। पॉलिसी 29 नवंबर 2024 से 28 नवंबर 2025 तक वैध थी। 18 जुलाई 2025 को चक्कर, वर्टिगो और जी मिचलाने की शिकायत पर उन्हें टाटा मेन अस्पताल में भर्ती कराया गया। 21 जुलाई को छुट्टी मिली।

अस्पताल में भर्ती होने के बाद कैशलेस इलाज के लिए बीमा कंपनी से अनुरोध किया गया, लेकिन कंपनी ने यह कहते हुए मंजूरी नहीं दी कि इलाज बिना भर्ती के भी संभव था। इसके बाद देवाशीष दत्ता को अस्पताल और दवाइयों पर कुल 45,073.80 रुपये खर्च करने पड़े।

कंपनी ने दावा खारिज करने के पक्ष में कहा कि शिकायतकर्ता ने बीमा लेते समय मधुमेह की जानकारी छिपाई थी और जरूरी दस्तावेज भी उपलब्ध नहीं कराए थे।

दोनों पक्षों के दस्तावेजों और दलीलों की जांच के बाद आयोग ने कहा कि जुलाई 2025 के मेडिकल रिकॉर्ड में मधुमेह का उल्लेख होना यह साबित नहीं करता कि बीमा लेते समय भी शिकायतकर्ता इस बीमारी से पीड़ित था। कंपनी को पूर्व बीमारी छिपाने का ठोस प्रमाण देना जरूरी था।

आयोग ने कहा कि बिना पर्याप्त मेडिकल आधार के बीमा दावा खारिज करना उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के तहत सेवा में कमी है। कंपनी को 45 दिनों के भीतर भुगतान करना होगा। देरी होने पर दावा खारिज करने की तिथि से भुगतान तक 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा।

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