जमशेदपुर। मानगो के संकोसाई स्थित बंगाली कॉलोनी में सार्वजनिक दुर्गा पूजा समिति की ओर से पश्चिम बंगाल की प्राचीन लोककला ‘पुतुल नाच’ का आयोजन किया गया। कठपुतलियों के माध्यम से भक्त प्रह्लाद की भक्ति और भगवान के प्रति उनकी अटूट आस्था की कथा प्रस्तुत की गई। पारंपरिक लोककला की इस अनूठी प्रस्तुति को देखने के लिए श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। खासकर बच्चों के बीच इस कार्यक्रम को लेकर उत्सुकता देखने को मिली।
पुतुल नाच पश्चिम बंगाल की समृद्ध लोक सांस्कृतिक परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। मनोरंजन के साथ-साथ यह कला धार्मिक कथाओं, नैतिक मूल्यों और सामाजिक संदेशों को आम लोगों तक पहुंचाने का प्रभावशाली माध्यम रही है। आधुनिक दौर में मोबाइल फोन, टेलीविजन और डिजिटल मनोरंजन के बढ़ते प्रभाव के बीच इस पारंपरिक कला का आयोजन नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने की एक सार्थक पहल के रूप में सामने आया।
बंगाली कॉलोनी सार्वजनिक दुर्गा पूजा समिति के अध्यक्ष सुजीत सरकार ने बताया कि समिति इस वर्ष दुर्गा पूजा का 39वां वर्ष मना रही है। समिति की ओर से हर वर्ष बंगाली परंपरा और रीति-रिवाजों के अनुरूप पूजा का आयोजन किया जाता है। उन्होंने कहा कि आज के बच्चों ने पारंपरिक कठपुतली नाच को करीब से नहीं देखा है। पहले मोबाइल और टेलीविजन जैसे साधन नहीं होने के बावजूद लोग अपनी संस्कृति, परंपराओं और सामूहिक आयोजनों के माध्यम से जीवन का आनंद लेते थे। इसी सांस्कृतिक विरासत से बच्चों और बड़ों को परिचित कराने के उद्देश्य से पुतुल नाच का आयोजन किया गया।
समिति के सदस्य रवींद्रनाथ ने बताया कि इस कार्यक्रम में भक्त प्रह्लाद की कथा के माध्यम से उनकी अटूट भक्ति और भगवान की अपने भक्तों के प्रति रक्षा भावना को दर्शाया गया। कथा यह संदेश देती है कि सच्ची आस्था, विश्वास और धर्म के मार्ग पर चलने वाले व्यक्ति की रक्षा के लिए भगवान स्वयं अवतरित होते हैं और अधर्म का अंत करते हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह की प्रस्तुतियों से बच्चों को धार्मिक कथाओं और नैतिक मूल्यों को सरल एवं रोचक तरीके से समझने का अवसर मिलता है।
समिति के एक अन्य सदस्य बाला शाह ने बताया कि पुतुल नाच की प्रस्तुति देने के लिए पश्चिम बंगाल के नदिया से कलाकारों की टीम जमशेदपुर पहुंची थी। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी के कई बच्चों को इस पारंपरिक कला के बारे में जानकारी तक नहीं है। ऐसे में इस आयोजन का उद्देश्य केवल धार्मिक मनोरंजन नहीं, बल्कि बंगाल की लोक संस्कृति और पारंपरिक कला को अगली पीढ़ी तक पहुंचाना भी है।
आयोजकों ने बताया कि उन्हें उम्मीद नहीं थी कि पुतुल नाच देखने के लिए इतनी बड़ी संख्या में श्रद्धालु और स्थानीय लोग पहुंचेंगे। लोगों की उत्सुकता और भीड़ ने समिति के सदस्यों को उत्साहित किया है। दर्शकों की अधिक संख्या को देखते हुए आयोजकों ने कहा कि अगले वर्ष से कार्यक्रम की व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया जाएगा, ताकि अधिक से अधिक लोग इस लोककला का आनंद सुविधाजनक तरीके से उठा सकें।
बंगाली कॉलोनी में आयोजित इस कार्यक्रम ने दुर्गा पूजा के उत्सवी माहौल के बीच पारंपरिक लोककला को नया मंच दिया और यह संदेश दिया कि आधुनिकता के दौर में भी अपनी सांस्कृतिक विरासत को सहेजना और नई पीढ़ी तक पहुंचाना जरूरी है।

