सिमडेगा। नौकरी दिलाने के नाम पर सुरक्षा राशि के रूप में करोड़ों रुपये की ठगी करने वाले एक संगठित गिरोह का सिमडेगा पुलिस ने पर्दाफाश किया है। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए गिरोह के सरगना समेत छह आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि ‘वीएसके फाउंडेशन’ नामक स्वयंसेवी संस्था के माध्यम से अलग-अलग पदों पर नियुक्ति और नौकरी दिलाने का झांसा देकर लोगों से सुरक्षा राशि वसूली जा रही थी। पुलिस की प्रारंभिक जांच में करीब पांच से छह करोड़ रुपये की ठगी का मामला सामने आया है।
मामले को लेकर बानो और कुरडेग थाना क्षेत्रों के ग्रामीणों ने पुलिस को लिखित शिकायत देकर संस्था पर नौकरी के नाम पर रुपये लेने और धोखाधड़ी करने का आरोप लगाया था। शिकायत के आधार पर बानो थाना में 3 सितंबर को कांड संख्या 27/26 तथा कुरडेग थाना में 25 अगस्त को कांड संख्या 36/26 दर्ज कर जांच शुरू की गई। मामलों की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर वरीय पुलिस उपाधीक्षक मुख्यालय और अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी के संयुक्त नेतृत्व में विशेष जांच दल का गठन किया गया।
विशेष जांच दल ने तकनीकी और मानवीय सूचनाओं के आधार पर कार्रवाई करते हुए छह आरोपियों को गिरफ्तार किया। गिरफ्तार आरोपियों में कुरडेग के सेमरटोली खिण्डा निवासी अशोक साय, बिहार के मुजफ्फरपुर निवासी ओम प्रकाश, सिमडेगा के टीटांगर निवासी एनिस केरकेट्टा और सरोज केरकेट्टा, रांची के हातमा निवासी गोरैती केरकेट्टा तथा बिहार के सीतामढ़ी निवासी कुन्दन शर्मा शामिल हैं। पुलिस के अनुसार अशोक साय का पूर्व आपराधिक इतिहास भी रहा है।
पुलिस जांच में सामने आया कि ‘वीएसके फाउंडेशन’ का संचालन प्राथमिकी अभियुक्त ओम प्रकाश कर रहा था। संस्था के तहत ‘नारी पैड सेवा’ और ‘बाल एवं जननी शिक्षा अभियान’ जैसे कार्यक्रम चलाए जा रहे थे। संस्था में राष्ट्रीय प्रमुख के नीचे राज्य प्रमुख, जिला प्रमुख, प्रखंड समन्वयक और केंद्र प्रभारी जैसे पद बनाए गए थे। इन पदों पर नियुक्ति के लिए लोगों से 40 हजार से लेकर तीन लाख रुपये तक सुरक्षा राशि ली जाती थी।
इसी तरह बाल एवं जननी शिक्षा अभियान में एनटीटी के पद के लिए 40 हजार रुपये और पीटीटी के लिए 60 हजार रुपये लिए जाने की बात जांच में सामने आई है। लोगों को वेतन और प्रोत्साहन राशि देने का भरोसा भी दिलाया जाता था। संस्था से जुड़े लोगों को अधिक से अधिक लोगों को जोड़ने के लिए प्रोत्साहित किया जाता था। इसके लिए व्हाट्सऐप के माध्यम से आकर्षक पोस्टर और पर्चे भेजकर दोगुने प्रोत्साहन तथा पुरस्कार का लालच दिए जाने की बात भी सामने आई है।
पुलिस के मुताबिक, संस्था के नाम पर वसूली गई रकम का इस्तेमाल निजी कमाई और संपत्ति खरीदने में किए जाने के प्रथम दृष्टया साक्ष्य मिले हैं। गिरफ्तार आरोपियों की निशानदेही पर मामले से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य बरामद किए गए हैं। पुलिस अब ठगी की राशि पीड़ितों को वापस दिलाने के उद्देश्य से आरोपियों की संपत्तियों को कुर्क करने की कानूनी प्रक्रिया में जुटी है। संस्था के माध्यम से बड़े पैमाने पर वित्तीय लेन-देन के तथ्य भी सामने आए हैं, जिसकी विभिन्न पहलुओं से जांच की जा रही है।
सभी छह आरोपियों को आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद 10 सितंबर को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि नौकरी या किसी संस्था में नियुक्ति के नाम पर किसी व्यक्ति अथवा संस्था को बिना सत्यापन के रुपये न दें। किसी भी संदिग्ध गतिविधि या ठगी की जानकारी तत्काल नजदीकी थाना अथवा पुलिस को देने की अपील की गई है।

