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मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना में बड़ी उपलब्धि, ठाणे क्रीक के नीचे भारत की पहली समुद्री रेल सुरंग की खुदाई शुरू

मुंबई। मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड रेल (बुलेट ट्रेन) परियोजना ने एक और महत्वपूर्ण पड़ाव हासिल कर लिया है। महाराष्ट्र में सावली (घंसोली) से विक्रोली की ओर दूसरी टनल बोरिंग मशीन (टीबीएम) के जरिए सुरंग निर्माण का कार्य शुरू कर दिया गया है। यह सुरंग भारत के किसी भी रेल कॉरिडोर के लिए समुद्र के नीचे बनने वाली पहली रेल सुरंग होगी। इस 10 किलोमीटर लंबे हिस्से में लगभग 7 किलोमीटर सुरंग ठाणे क्रीक के नीचे समुद्र के भीतर बनाई जाएगी।

परियोजना के तहत कुल 21 किलोमीटर लंबा भूमिगत सुरंग मार्ग विकसित किया जा रहा है। इसमें सावली (घंसोली) से बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स (बीकेसी) तक 16 किलोमीटर का हिस्सा अत्याधुनिक टनल बोरिंग मशीनों की सहायता से तैयार किया जाएगा, जबकि शेष 5 किलोमीटर सुरंग का निर्माण न्यू ऑस्ट्रियन टनलिंग मेथड (एनएटीएम) से पहले ही पूरा किया जा चुका है। इससे पहले पहली टीबीएम ने 5 जुलाई 2026 को विक्रोली से बीकेसी की दिशा में अपनी खुदाई शुरू की थी।

इस परियोजना में इस्तेमाल की जा रही टीबीएम भारत में रेल सुरंग निर्माण के लिए अब तक की सबसे बड़ी मशीनों में शामिल है। इसका कटरहेड 13.6 मीटर व्यास का है, जो लगभग चार मंजिला इमारत की ऊंचाई के बराबर है। करीब 3,200 टन वजनी और 96 मीटर लंबी यह मशीन अत्याधुनिक तकनीक से लैस है। इसमें कटरहेड, मेन बेयरिंग, जॉ क्रशर, मेन शील्ड, टेल शील्ड, इरेक्टर और चार विशेष गैंट्री जैसी कई महत्वपूर्ण इकाइयां लगी हैं।

मिक्सशील्ड तकनीक पर आधारित यह सेमी-ऑटोमैटिक स्लरी टीबीएम दबावयुक्त बेंटोनाइट स्लरी की मदद से खुदाई के दौरान सुरंग के अग्रभाग को स्थिर बनाए रखती है। मुंबई जैसे जटिल भूगर्भीय क्षेत्र में यह तकनीक जमीन धंसने के जोखिम को कम करने और सतह पर न्यूनतम प्रभाव सुनिश्चित करने के लिए सबसे उपयुक्त मानी जाती है। मशीन में एडवांस्ड सेमी-कंटीन्यूअस एडवांस सिस्टम भी लगाया गया है, जिससे खुदाई और सुरंग की रिंग लगाने का कार्य एक साथ सुरक्षित तरीके से किया जा सकता है। इससे निर्माण की गति बढ़ने के साथ परियोजना समय पर पूरी करने में भी मदद मिलेगी।

टीबीएम को जमीन के भीतर उतारने के लिए सावली में करीब 39 मीटर गहरा शाफ्ट तैयार किया गया है, जिसकी गहराई लगभग 12 मंजिला इमारत के बराबर है। सीमित स्थान के कारण मशीन को अलग-अलग हिस्सों में नीचे उतारा गया। पहले गैंट्री को एनएटीएम सुरंग में स्थापित किया गया और उसके बाद मुख्य शील्ड तथा कटरहेड को नीचे पहुंचाकर मशीन को जोड़ा गया।

सुरक्षा के लिहाज से मशीन में अत्याधुनिक मल्टी-गैस मॉनिटरिंग सिस्टम लगाया गया है, जो मीथेन, ऑक्सीजन, कार्बन मोनोऑक्साइड और कार्बन डाइऑक्साइड की लगातार निगरानी करता है। इसके अलावा स्वचालित अग्निशमन प्रणाली, वॉटर कर्टेन, स्प्रिंकलर नेटवर्क और आपातकालीन शरण कक्ष जैसी कई सुरक्षा व्यवस्थाएं भी उपलब्ध कराई गई हैं।

शाफ्ट परिसर में स्लरी ट्रीटमेंट प्लांट, वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट, बेंटोनाइट स्टोरेज, समर्पित बिजली उपकेंद्र, बैकअप जनरेटर, रेडी-मिक्स कंक्रीट प्लांट और अन्य आधुनिक लॉजिस्टिक सुविधाएं विकसित की गई हैं। वहीं सुरंग निर्माण के दौरान सतह की गतिविधियों और आसपास की संरचनाओं पर प्रभाव की निगरानी के लिए रियल-टाइम मॉनिटरिंग सिस्टम, सेटलमेंट सेंसर, स्ट्रेन गेज, टिल्ट मीटर और सीस्मोग्राफ जैसे उपकरण लगाए गए हैं।

परियोजना के इंजीनियरों के अनुसार टीबीएम से तैयार होने वाली पूरी सुरंग को पूरी तरह वाटरप्रूफ बनाया जा रहा है। इसके लिए सुरंग की आंतरिक परत में डबल लेयर ईपीडीएम गैस्केट और हाइड्रोफिलिक सील का उपयोग किया जा रहा है, जिससे समुद्री पानी के प्रवेश को रोका जा सके और सुरंग की दीर्घकालिक मजबूती एवं सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

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