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*चाईबासा में भव्य रूप से मना विश्व आदिवासी दिवस, 25 हजार से अधिक लोगों ने लिया हिस्सा*

चाईबासा: आदिवासियों की एकता, अखंडता, पहचान और समृद्ध संस्कृति के प्रतीक विश्व आदिवासी दिवस का आयोजन रविवार को चाईबासा के सिंहभूम स्पोर्ट्स एसोसिएशन मैदान में भव्य रूप से किया गया। विश्व आदिवासी दिवस आयोजन समिति कोल्हान, चाईबासा के तत्वावधान में आयोजित समारोह में पश्चिमी सिंहभूम के विभिन्न क्षेत्रों के अलावा ओडिशा, बंगाल, सरायकेला-खरसावां और पूर्वी सिंहभूम से बड़ी संख्या में आदिवासी समाज के लोग पहुंचे। आयोजन समिति के अनुसार कार्यक्रम में 25 हजार से अधिक महिला-पुरुष, युवक-युवतियां, बच्चे और अभिभावक शामिल हुए।

कार्यक्रम में विकास आयुक्त उत्कर्ष कुमार, नगर परिषद चाईबासा के अध्यक्ष नितिन प्रकाश, सिविल सर्जन डा. जुझार मांझी सहित कई लोग मौजूद थे। कार्यक्रम की शुरुआत समिति के संयोजक गणेश पाट पिंगुवा के स्वागत भाषण से हुई। इसके बाद विभिन्न आदिवासी समाज के पाहन एवं दिउरी द्वारा सुख, समृद्धि, शांति और समाज की खुशहाली के लिए सामूहिक पूजा-अर्चना की गई।

समारोह में हो, उरांव, संथाल, मुंडा, लोहरा, भूमिज, बिरहोर, मानकी-मुंडा सहित 40 से अधिक आदिवासी सामाजिक संगठनों के महिला-पुरुष और युवक-युवतियां शामिल हुए। विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे लोगों ने पारंपरिक परिधान पहनकर आदिवासी संस्कृति और परंपरा के संरक्षण का संदेश दिया। कार्यक्रम के दौरान आदिवासी समाज के वीर शहीदों को श्रद्धांजलि भी अर्पित की गई।

पारंपरिक गीत-संगीत और नृत्य ने बांधा समां

समारोह में जनजातीय कलाकारों ने पारंपरिक गीत, संगीत और नृत्य की प्रस्तुति देकर आदिवासी संस्कृति की विविधता और समृद्ध विरासत की झलक प्रस्तुत की। पारंपरिक वाद्य यंत्रों और नृत्य की प्रस्तुतियों ने लोगों का मन मोह लिया। कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से आदिवासी परंपरा, भाषा, संस्कृति और पहचान के संरक्षण का संदेश दिया।

विभिन्न क्षेत्रों में बेहतर कार्य करने वालों को किया सम्मानित

विश्व आदिवासी दिवस समारोह के दौरान विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य करने वाले लोगों को सम्मानित किया गया। दिव्यांग प्रेरणा सम्मान के लिए लबती होनहागा, वृद्ध आश्रम क्षेत्र में कार्य के लिए कुनी पूर्ति, महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में मंजू बिरूली, युवा नेतृत्व के लिए प्रधान बानसिंग, उत्कृष्ट शिक्षक के रूप में विमल किशोर बोयपाई और सुरेश चंद्र सिंकू को सम्मानित किया गया।

भाषा एवं साहित्य के क्षेत्र में जवाहरलाल बंकिरा और तिलक बारी, कृषि एवं प्राकृतिक खेती में कन्हैया लाल हेम्ब्रम (कुबरम) और बुधन पुरती, पारंपरिक ज्ञान संरक्षण में बोयो गागराई, कला एवं संस्कृति के क्षेत्र में सतीश सामड, विश्वनाथ लकड़हारा और पुष्परा सावंत को सम्मानित किया गया।

खेल के क्षेत्र में विजय सिंह सुन्डी और महिर्षी महेन्द्र सिंकू, पर्यावरण संरक्षण में तिलक बारी, स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में सीएस डा. जुझार मांझी, डा. शिवचरण हांसदा और डा. जगन्नाथ हेम्ब्रम को सम्मान मिला।

उद्यमिता एवं रोजगार सृजन के क्षेत्र में मंगल सिंह कुटिया और भरत खलखो, पत्रकारिता एवं जनसंचार के क्षेत्र में गणेश बारी, विज्ञान एवं नवाचार के क्षेत्र में सीताराम सिंकू और डा. ब्रज मोहन पिंगुवा को सम्मानित किया गया।

जीवन गौरव सम्मान से संचू तिर्की को सम्मानित किया गया। सामुदायिक नेतृत्व के क्षेत्र में महिला ग्रामीण मुंडारी सोमवारी चातर बेताजुरी को सम्मान मिला। वहीं सांप और हाथी से लोगों की सुरक्षा में योगदान के लिए दीपक बारी और अमन तिर्की को सम्मानित किया गया।

भाषा, संस्कृति और जल-जंगल-जमीन की रक्षा का लिया संकल्प

समारोह में वक्ताओं ने आदिवासी भाषा, संस्कृति और परंपरा के संरक्षण एवं संवर्धन पर जोर दिया। शिक्षा और युवाओं के नेतृत्व को बढ़ावा देने, जल, जंगल और जमीन की रक्षा करने, समाज में एकता, भाईचारा और सामाजिक समरसता बनाए रखने का संकल्प लिया गया। वक्ताओं ने आदिवासी समाज के सामने मौजूद वर्तमान चुनौतियों पर भी चर्चा की तथा आदिवासी भाषा और धर्म के संरक्षण एवं संवर्धन की आवश्यकता पर बल दिया।

50 स्टॉल में दिखी आदिवासी संस्कृति की झलक

समारोह स्थल पर आदिवासी पारंपरिक व्यंजन और परिधानों के करीब 50 स्टॉल लगाए गए थे। इन स्टॉलों के माध्यम से लोगों को पारंपरिक खान-पान, पहनावा और स्थानीय संस्कृति से रूबरू होने का अवसर मिला। कार्यक्रम का लाइव प्रसारण भी किया गया।

सरना झंडों से सजा चाईबासा

विश्व आदिवासी दिवस को लेकर पूरे चाईबासा शहर में सरना झंडे लगाए गए थे। शहर का वातावरण आदिवासी संस्कृति और परंपरा के रंग में रंगा नजर आया। समारोह में शामिल लोगों ने आदिवासी एकता, संस्कृति, परंपरा, भाषा और पहचान के संरक्षण का संकल्प लिया। पूरे आयोजन के दौरान सिंहभूम स्पोर्ट्स एसोसिएशन मैदान में उत्सव जैसा माहौल बना रहा।

आयोजन में इनका रहा विशेष योगदान

कार्यक्रम को सफल बनाने में संयोजक गणेश पाट पिंगुवा, अध्यक्ष ईपिल सामड, सचिव रवि बिरुली, कोषाध्यक्ष संजय लागुरी, अशोक नाग, लालू कुजूर, गब्बर सिंह हेंब्रम, गोविन्द बिरुवा, शेरसिंह बिरुवा, ऑयबन हेंब्रम, सांचू तिर्की, बाबू लाल बारह, पंकज खलको, सुरेन्द्र पूर्ति, लिटिल सिंकू, राजकमल पाट पिंगुवा, आकाश हेंब्रम, विष्णु मिंज, कर्मचंद्र मुंडा, नवल कच्छप, पंकज खलखो, मनमोहन सहित अन्य लोगों की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

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