गोइलकेरा: गोइलकेरा प्रखंड के आराहासा पंचायत स्थित उप स्वास्थ्य केंद्र के समीप बइपी मैदान में रविवार को प्रखंड स्तरीय विश्व आदिवासी दिवस समारोह का आयोजन किया गया। सुदूरवर्ती ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों की अधिक से अधिक सहभागिता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से आयोजित समारोह शांतिपूर्ण एवं सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।
कार्यक्रम का शुभारंभ सामूहिक दीप प्रज्वलित कर किया गया। समारोह में गोइलकेरा प्रखंड के विभिन्न आदिवासी समुदायों के प्रतिनिधि, मानकी-मुंडा संघ के सदस्य, सामाजिक कार्यकर्ता, जनप्रतिनिधि, शिक्षाविद, विद्यालयों के प्रधानाचार्य, विद्यार्थी तथा संबंधित विभागों के पदाधिकारी सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल हुए।
समारोह के दौरान सामाजिक, शैक्षणिक एवं अन्य क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान देने वाले लोगों को सम्मानित किया गया। वहीं गोइलकेरा प्रखंड के विभिन्न उच्च विद्यालयों एवं +2 विद्यालयों में मैट्रिक और इंटरमीडिएट परीक्षा में प्रथम एवं द्वितीय स्थान प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को प्रशस्ति-पत्र देकर सम्मानित किया गया।
इसके अलावा विभिन्न मानकी-मुंडा एवं आदिवासी समाजों के सामाजिक प्रतिनिधियों को समाज, संस्था, विद्यालय एवं क्षेत्र के प्रति उनके उत्कृष्ट कार्य, समर्पण, अनुशासन, लगन और सराहनीय योगदान के लिए प्रशस्ति-पत्र प्रदान किए गए।
हर वर्ष अलग-अलग पंचायतों में होगा प्रखंड स्तरीय कार्यक्रम
समारोह में तरकाडकोचा पंचायत के मुखिया एवं समाजसेवी गणेश मुखिया ने कहा कि अब तक अधिकांश बड़े कार्यक्रम प्रखंड अथवा जिला मुख्यालय तक सीमित रहते थे। इसके कारण सुदूरवर्ती क्षेत्रों के ग्रामीणों की अपेक्षित सहभागिता नहीं हो पाती थी। इसी को ध्यान में रखते हुए इस वर्ष प्रखंड स्तरीय विश्व आदिवासी दिवस समारोह का आयोजन आराहासा जैसे सुदूरवर्ती क्षेत्र में किया गया है।
उन्होंने कहा कि प्रत्येक वर्ष प्रखंड स्तरीय कार्यक्रम को अलग-अलग पंचायतों में आयोजित करने का प्रयास किया जाएगा, ताकि कार्यक्रम में ग्रामीणों की सहभागिता बढ़े और इसका लाभ गांव-गांव तक पहुंच सके।
एकजुटता, शिक्षा और सांस्कृतिक पहचान पर दिया जोर
कार्यक्रम में वक्ताओं ने आदिवासी समाज की सांस्कृतिक पहचान, भाषा, शिक्षा, संवैधानिक अधिकार, सामाजिक एकजुटता, जल-जंगल-जमीन और ग्रामसभा की भूमिका सहित विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर अपने विचार रखे। वक्ताओं ने समाज को शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ाने, अपनी भाषा और संस्कृति के संरक्षण तथा सामाजिक एकजुटता बनाए रखने पर जोर दिया।
इस दौरान महेंद्र कोड़ाह, कृष्ण डांगिल, घासीराम पाड़ेया, जिला परिषद सदस्य ज्योति मेराल, डॉ. मनोज कुमार कोड़ाह, डॉ. दिनेश चंद्र बोयपाई, आदिवासी हो समाज महासभा के प्रखंड अध्यक्ष पातोर जोंको, प्रखंड प्रमुख निरुमानी कोड़ाह, प्रखंड विकास पदाधिकारी विवेक कुमार, सोनाराम कोड़ाह एवं जोंको अंगरिया ने अपने विचार रखे।
कार्यक्रम का संचालन लक्ष्मण पुरती एवं दीपिका लकड़ा ने किया।
समारोह में सुनीता मेराल, पाटेल मेराल, राम हरि संडिल, सवान संडिल, मानाराम हेम्ब्रोम, ओयबोन हेम्ब्रोम, लकिन्द्र कोड़ाह, मानसिंह कोड़ाह, उदय चेरोवा, सिकन्दर जोंको, लुदगु केराई, द्रोपती पूर्ति, घनश्याम अंगरिया, जुरेन्द्र अंगरिया, मलकेन्द्र अंगरिया सहित मानकी-मुंडा संघ, आदिवासी हो समाज महासभा एवं विभिन्न आदिवासी समाजों के सामाजिक प्रतिनिधि, शैक्षणिक संस्थानों के प्रधानाचार्य, विद्यार्थी, सामाजिक कार्यकर्ता, संबंधित विभागों के पदाधिकारी एवं गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

