जमशेदपुर: सिंहभूम जिला हिन्दी साहित्य सम्मेलन/तुलसी भवन में आयोजित तुलसी जयंती समारोह के तहत रविवार को श्री हनुमान रूप-सज्जा प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। प्रतियोगिता में शहर के 26 विद्यालयों के कुल 186 विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कक्षा 1 से 3 तथा कक्षा 4 से 6 तक के विद्यार्थियों के लिए आयोजित इस प्रतियोगिता में बच्चों ने भगवान श्री हनुमान के विभिन्न स्वरूपों को आकर्षक वेशभूषा, मेकअप और भाव-भंगिमाओं के माध्यम से जीवंत कर दिया। प्रतियोगिता के दौरान पूरे परिसर में धार्मिक और सांस्कृतिक वातावरण देखने को मिला।
कार्यक्रम का शुभारंभ समाजसेवी शिव शंकर सिंह, चिंटू सिंह, जुगुन पांडेय तथा सिंहभूम जिला हिन्दी साहित्य सम्मेलन के पदाधिकारियों एवं साहित्यकारों ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया। इस अवसर पर मानद महासचिव डॉ. प्रसेनजित तिवारी ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि तुलसी जयंती के अवसर पर इस तरह के आयोजन बच्चों को भारतीय संस्कृति, धार्मिक परंपराओं और नैतिक मूल्यों से जोड़ने का सशक्त माध्यम हैं। उन्होंने प्रतियोगिता की रूपरेखा की जानकारी देते हुए बताया कि हर वर्ष बड़ी संख्या में विद्यालयों और विद्यार्थियों की सहभागिता बढ़ रही है।
प्रतियोगिता में शामिल बच्चों ने हनुमान जी के बाल स्वरूप, संजीवनी पर्वत ले जाते हुए, रामभक्ति, लंका दहन तथा अन्य प्रसंगों को अपनी वेशभूषा और प्रस्तुति के माध्यम से प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। बच्चों की सृजनात्मकता, आत्मविश्वास और मंच पर प्रस्तुति ने उपस्थित अभिभावकों और अतिथियों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
प्रतियोगिता का मूल्यांकन साहित्य एवं शिक्षा जगत से जुड़े विशेषज्ञों ने किया। निर्णायकों ने प्रतिभागियों की वेशभूषा, प्रस्तुति, संवाद शैली, भाव-भंगिमा और विषय की अभिव्यक्ति के आधार पर अंक प्रदान किए। प्रतियोगिता के समापन पर सभी प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र एवं उपहार देकर सम्मानित किया गया, जबकि उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को विशेष पुरस्कार प्रदान किए गए।
कार्यक्रम को सफल बनाने में सिंहभूम जिला हिन्दी साहित्य सम्मेलन/तुलसी भवन के पदाधिकारियों, साहित्यकारों, शिक्षकों, विद्यालयों के प्रतिनिधियों और स्वयंसेवकों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। समारोह में बड़ी संख्या में अभिभावक, शिक्षक-शिक्षिकाएं एवं शहर के साहित्य और संस्कृति प्रेमी उपस्थित रहे। पूरे आयोजन के दौरान बच्चों के उत्साह, अभिभावकों की सहभागिता और सांस्कृतिक वातावरण ने तुलसी जयंती समारोह को यादगार बना दिया।

