चाईबासा: टाटा स्टील के नोआमुंडी स्थित परिचालन क्षेत्र में 500 केएलडी क्षमता वाले तृतीयक अपशिष्ट जल उपचार संयंत्र का उद्घाटन किया गया। संयंत्र का उद्घाटन टाटा स्टील ओएमक्यू के महाप्रबंधक देबाशीष जेना ने किया। उन्नत रिवर्स ऑस्मोसिस तकनीक पर आधारित इस संयंत्र को जल संरक्षण और सतत विकास की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया गया है।
कंपनी के अनुसार, यह टाटा स्टील में अपनी तरह का पहला संयंत्र है। देश में आईओसीएल की मुंबई रिफाइनरी के बाद इस प्रकार का यह दूसरा संयंत्र बताया गया है। सतत विकास योजना के तहत स्थापित इस परियोजना पर 4.95 करोड़ रुपये की लागत आई है।
परियोजना का मुख्य उद्देश्य बैतरणी नदी से लिए जाने वाले ताजे पानी की मात्रा को कम करना और औद्योगिक प्रक्रियाओं के लिए उपचारित पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करना है। संयंत्र में आधुनिक तकनीक के माध्यम से अपशिष्ट जल का उपचार किया जाएगा। इसके बाद प्राप्त उपचारित जल का उपयोग प्रोसेस प्लांट की जरूरतों को पूरा करने में किया जाएगा।
टाटा स्टील के अनुसार, संयंत्र से ताजे पानी पर निर्भरता कम करने के साथ पानी के पुन: उपयोग को बढ़ावा मिलेगा। इससे प्राकृतिक जल संसाधनों के संरक्षण में भी मदद मिलने की उम्मीद है।
कंपनी ने बताया कि अपशिष्ट जल के उपचार के बाद स्वच्छ, पारदर्शी और गंधरहित पानी उपलब्ध कराया जाएगा। इससे औद्योगिक गतिविधियों में पानी के दोबारा उपयोग की व्यवस्था मजबूत होगी।
यह परियोजना टाटा स्टील की ओर से पर्यावरण संरक्षण, जल संसाधनों के बेहतर उपयोग और सतत औद्योगिक विकास के लिए किए जा रहे प्रयासों का हिस्सा है। कंपनी की ओर से पर्यावरण अनुकूल तकनीकों के इस्तेमाल और संसाधनों के संरक्षण पर लगातार जोर दिया जा रहा है।

