जमशेदपुर: शहर के प्रख्यात समाजसेवी एवं सिख समाज के वरिष्ठ सदस्य सरदार अजीत सिंह को मंगलवार को श्रद्धापूर्वक अंतिम विदाई दी गई। तकनीकी कारणों से उनकी अंतिम यात्रा पूर्व निर्धारित समय सुबह 10 बजे के बजाय दोपहर 12 बजे डिमना रोड स्थित आवास से निकली और लगभग 12:20 बजे साकची स्थित स्वर्णरेखा बर्निंग घाट पहुंची, जहां सिख रीति-रिवाजों के अनुसार अंतिम संस्कार संपन्न हुआ।
अंतिम संस्कार से पूर्व ह्यूम पाइप गुरुद्वारा साहिब के वजीर ग्रंथी ने गुरु महाराज के हुक्म अनुसार अरदास कर आदेश प्राप्त किया। इस दौरान बड़ी संख्या में सिख संगत, सामाजिक कार्यकर्ता एवं विभिन्न गुरुद्वारा प्रबंधक समितियों के पदाधिकारी उपस्थित रहे।
सरदार अजीत सिंह लंबे समय तक झारखंड सिख कोऑर्डिनेशन कमिटी और सिख समाज आंदोलन समिति के आजीवन चेयरमैन रहे। इसके अलावा उन्होंने सिख संगत जत्था सहित विभिन्न सामाजिक एवं धार्मिक संस्थाओं में सक्रिय भूमिका निभाई। ह्यूम पाइप गुरुद्वारा और मानगो गुरुद्वारा में निर्माण कार्यों से लेकर गुरु पर्वों के आयोजन तक वे हर सेवा कार्य में अग्रणी रहते थे। अपने सामाजिक जीवन में उन्होंने सेवा, समर्पण और संगठन को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। उनके परिवार में पांच बेटियां और एक बेटा हैं।
अंतिम यात्रा में साकची गुरुद्वारा साहिब में संगरांद के बड़े धार्मिक कार्यक्रम के बावजूद गुरुद्वारा प्रबंधक कमिटी के प्रधान सरदार निशान सिंह ने अपनी टीम के साथ कार्यक्रम की व्यवस्था संभालते हुए दिवंगत को अंतिम विदाई देने में सहभागिता निभाई। सचिव सरदार परमजीत सिंह काले सहित कई पदाधिकारी भी अंतिम संस्कार तक मौजूद रहे।
इस अवसर पर सेंट्रल गुरुद्वारा प्रबंधक कमिटी के पूर्व प्रधान सरदार गुरमुख सिंह (मुख्खे), चेयरमैन सरदार त्रिलोक सिंह बाबा साथ ही विभिन्न गुरुद्वारा प्रबंधक समितियों के पदाधिकारी, झारखंड सिख कोऑर्डिनेशन कमिटी एवं सिख समाज आंदोलन समिति के प्रतिनिधि, सामाजिक संगठनों के सदस्य तथा शहर और आसपास के क्षेत्रों से पहुंचे सैकड़ों लोगों ने पार्थिव शरीर पर श्रद्धासुमन अर्पित किए और दिवंगत को भावभीनी श्रद्धांजलि दी।
परिवार की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार 18 जुलाई से डिमना रोड स्थित आवास, ब्लू बेल्स स्कूल के समीप, श्री गुरु ग्रंथ साहिब का अखंड पाठ साहिब प्रारंभ होगा। इसका समापन 20 जुलाई को होगा। अखंड पाठ की समाप्ति के बाद उसी दिन दोपहर 12 बजे से 1:20 बजे तक साकची गुरुद्वारा साहिब में कीर्तन दरबार के माध्यम से श्रद्धांजलि सभा आयोजित की जाएगी, जिसके बाद गुरु का लंगर होगा।
परिवार ने बताया कि मुंबई और बेंगलुरु से आने वाले कुछ परिजनों के विलंब से पहुंचने के कारण अंतिम यात्रा निर्धारित समय से देर से निकली। इससे अंतिम यात्रा में शामिल होने पहुंचे लोगों को हुई असुविधा के लिए परिवार की ओर से समाज से क्षमा याचना की गई।
दिवंगत के पुत्र सरदार बलविंदर सिंह ने इस दुखद घड़ी में परिवार के साथ खड़े रहने के लिए झारखंड सिख कोऑर्डिनेशन कमिटी, सिख समाज आंदोलन समिति, विभिन्न गुरुद्वारा प्रबंधक समितियों, सामाजिक संस्थाओं और सभी श्रद्धांजलि अर्पित करने वाले लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया।

