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Wed. May 27th, 2026

आंधी-तूफान ने उजाड़ी किसानों की उम्मीदें, पटमदा-पोटका समेत कई इलाकों में हजारों क्विंटल आम गिरे

जमशेदपुर। पूर्वी सिंहभूम जिले के पटमदा, पोटका, बहरागोड़ा और चाकुलिया प्रखंडों में मंगलवार देर रात आए तेज आंधी-तूफान ने किसानों को भारी नुकसान पहुंचाया है। अचानक चली तेज हवाओं और बारिश के कारण कई गांवों में आम के बागानों से बड़ी मात्रा में कच्चे और तैयार आम टूटकर जमीन पर गिर गए। इससे किसानों की महीनों की मेहनत पर पानी फिर गया है। सबसे अधिक नुकसान उन किसानों को हुआ है जिन्होंने इस वर्ष बेहतर उत्पादन की उम्मीद में आम के बागानों की विशेष देखभाल की थी।

ग्रामीण क्षेत्रों में बिरसा हरित ग्राम योजना के तहत लगाए गए आम के बागान भी तूफान की चपेट में आ गए। कई जगहों पर पेड़ों की बड़ी-बड़ी डालियां टूट गईं, जबकि हजारों की संख्या में आम जमीन पर बिखर गए। किसानों का कहना है कि तेज हवा इतनी जोरदार थी कि कुछ बागानों में छोटे पेड़ भी उखड़ गए। आंधी के बाद बुधवार सुबह जब किसान अपने बागानों में पहुंचे तो वहां का दृश्य देखकर मायूस हो गए।

पटमदा प्रखंड के जमुआ पंचायत निवासी किसान कुनू मुंडा ने बताया कि उनके बागान से करीब 20 क्विंटल आम गिर गए। उन्होंने कहा कि एक साथ इतनी मात्रा में गिरे आम की बिक्री कर पाना संभव नहीं हो सका। कई आम खराब होने लगे हैं, जिससे उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा। किसान ने बताया कि इस बार फसल अच्छी होने के कारण उन्हें बेहतर आमदनी की उम्मीद थी, लेकिन तूफान ने सारी उम्मीदें तोड़ दीं।

माचाडीहा गांव के किसान और पूर्व मुखिया प्रभाष हांसदा ने बताया कि उनके बागान में भी करीब 10 क्विंटल आम झड़ गए। बाजार में तत्काल खरीदार नहीं मिलने के कारण उन्हें कई लोगों के बीच मुफ्त में आम बांटना पड़ा। उन्होंने कहा कि यदि प्रशासन समय पर व्यवस्था करता तो किसानों को कुछ राहत मिल सकती थी।

जोभी, कालियाम, माटियाबांधी, बेलडीह और आसपास के कई गांवों में भी आम की फसल को भारी नुकसान पहुंचा है। ग्रामीणों के अनुसार कई किसानों ने बैंक और स्वयं सहायता समूहों से कर्ज लेकर बागानों की देखभाल की थी। अब फसल बर्बाद होने से उनकी चिंता बढ़ गई है। किसानों का कहना है कि इस बार मौसम अनुकूल रहने के कारण आम की पैदावार काफी अच्छी हुई थी और व्यापारियों से अच्छे दाम मिलने की उम्मीद थी।

आंधी-तूफान के बाद प्रभावित किसानों ने प्रशासन से नुकसान का सर्वे कर मुआवजा देने की मांग की है। किसानों का कहना है कि यदि सरकार राहत नहीं देती है तो उन्हें आर्थिक संकट का सामना करना पड़ेगा। वहीं स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने भी कृषि विभाग से प्रभावित गांवों का दौरा कर वास्तविक नुकसान का आकलन करने की मांग की है।

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