जमशेदपुर। पूर्वी सिंहभूम जिले के पोटका प्रखंड कार्यालय में बुधवार को सामाजिक संस्था युवा (यूथ यूनिटी फॉर वॉलंटरी एक्शन) ने रीबिल्ड इंडिया फंड के सहयोग से बाल विवाह के खिलाफ एक प्रखंड स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया। कार्यशाला का केंद्र बिंदु बाल विवाह के दुष्प्रभावों पर चर्चा और समाज में इसके खिलाफ जागरूकता बढ़ाना रहा, जिसमें मुख्य रूप से स्वास्थ्य विशेषज्ञों के विचारों को प्राथमिकता दी गई।
कार्यक्रम में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की प्रीति रॉय ने अपने संबोधन में बाल विवाह को स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से बेहद खतरनाक बताते हुए कहा कि कम उम्र में विवाह और गर्भधारण से लड़कियों में एनीमिया, कुपोषण और मातृ मृत्यु दर जैसी गंभीर समस्याएं तेजी से बढ़ती हैं। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ एक सामाजिक समस्या नहीं, बल्कि एक गंभीर स्वास्थ्य संकट भी है। उन्होंने जमीनी स्तर पर काम कर रहे स्वास्थ्य कर्मियों और सहिया साथियों से अपील की कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में लोगों को जागरूक करें और बाल विवाह रोकने में सक्रिय भूमिका निभाएं।
कार्यशाला की शुरुआत प्रोजेक्ट कोऑर्डिनेटर चन्द्रकला मुंडा के स्वागत संबोधन से हुई, जबकि संचालन अंजना देवगम ने किया। इस दौरान पंचायती राज पदाधिकारी मनोज सिन्हा ने कहा कि ग्रामीण समाज में आज भी बाल विवाह एक बड़ी चुनौती बना हुआ है, जिसे खत्म करने के लिए सरकारी योजनाओं और कानूनों की जानकारी हर घर तक पहुंचाना जरूरी है। उन्होंने अभिभावकों से बेटियों को शिक्षित और आत्मनिर्भर बनाने पर जोर दिया।
वहीं, थाना के सब-इंस्पेक्टर कानूराम ने स्पष्ट किया कि बाल विवाह कानूनन अपराध है और इसकी सूचना देना हर नागरिक की जिम्मेदारी है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि पुलिस प्रशासन इस दिशा में हर संभव सहयोग करेगा।
संस्था की सचिव वर्णाली चक्रवर्ती ने संगठन के कार्यों की जानकारी देते हुए कहा कि संस्था लगातार ग्रामीण क्षेत्रों में किशोरियों और महिलाओं के स्वास्थ्य, शिक्षा और अधिकारों के लिए काम कर रही है। उन्होंने सामुदायिक भागीदारी को बाल विवाह उन्मूलन का सबसे प्रभावी माध्यम बताया।
कार्यक्रम में विभिन्न पंचायतों के जनप्रतिनिधि, सहिया साथी और स्वास्थ्य कर्मियों ने भाग लिया। इस दौरान प्रतिभागियों के साथ विचार-विमर्श और अनुभव साझा किए गए, जिससे विषय की समझ और गहरी हुई। साथ ही, पंचायत और ग्राम सभा स्तर पर इस मुद्दे को प्राथमिकता देने पर सहमति बनी।
कार्यक्रम का समापन “बाल विवाह मुक्त समाज एवं पर्यावरण संरक्षण” के संदेश के साथ पौधों को जल अर्पित कर किया गया। अंत में चाँदमनी ने धन्यवाद ज्ञापन किया। कार्यशाला को सफल बनाने में संस्था के कई कार्यकर्ताओं का सक्रिय योगदान रहा।

