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सुर और ताल का संतुलन जीवन में सफलता की राह दिखाता है : सरयू राय जमशेदपुर। जमशेदपुर पश्चिम के विधायक सरयू राय ने कहा कि संगीत केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि व्यक्तित्व निर्माण और आत्मिक विकास का सशक्त साधन है। जो व्यक्ति सुर और ताल के बीच समन्वय स्थापित करना सीख लेता है, वह जीवन में भी संतुलन बनाकर सफलता की ऊंचाइयों तक पहुंचता है। उन्होंने कहा कि संगीत इंसान को अनुशासन, संवेदनशीलता और एकाग्रता का पाठ पढ़ाता है। रविवार को बारीडीह स्थित अपने कार्यालय परिसर में ‘धुन आर्ट एंड म्यूजिक’ द्वारा शुरू किए गए संगीत प्रशिक्षण केंद्र का उद्घाटन करते हुए सरयू राय ने कहा कि संगीत ईश्वर से जुड़ने का माध्यम है। भारतीय संस्कृति में संगीत की समृद्ध परंपरा रही है और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में आज भी हर परिवार में संगीत को विशेष महत्व दिया जाता है। उन्होंने विश्वास जताया कि इस केंद्र में बच्चों को गायन के साथ-साथ विभिन्न वाद्य यंत्रों का भी व्यवस्थित प्रशिक्षण मिलेगा, जिससे उनकी प्रतिभा निखरेगी। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में संगीत की शैली तेजी से बदल रही है, लेकिन मधुरता, सुर और ताल का महत्व कभी कम नहीं हो सकता। पुराने दौर के सुरीले गीत आज भी लोगों के दिलों में बसे हुए हैं। संगीत प्रकृति का ऐसा उपहार है, जिससे हर व्यक्ति किसी न किसी रूप में जुड़ा रहता है। दुनिया का संपूर्ण संगीत केवल सात स्वरों पर आधारित है और इन्हीं स्वरों में अनंत संभावनाएं छिपी हैं। इस अवसर पर सरयू राय ने बारीडीह क्षेत्र में नर्सरी से कक्षा पांच तक के बच्चों के लिए एक गैर-व्यावसायिक विद्यालय शुरू करने की अपनी योजना भी साझा की। उन्होंने कहा कि इस विद्यालय का उद्देश्य शिक्षा को व्यवसाय बनाना नहीं, बल्कि बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना होगा। अभिभावकों से केवल सामान्य शुल्क लिया जाएगा ताकि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चे भी अच्छी शिक्षा प्राप्त कर सकें। उन्होंने विकास विद्यालय के विकास सिंह से इस पहल में सहयोग देने और शिक्षण कार्य से जुड़ने का आग्रह किया। कार्यक्रम में स्वर्णरेखा क्षेत्र विकास ट्रस्ट के ट्रस्टी अशोक गोयल, वरिष्ठ समाजसेवी शिवशंकर सिंह, संस्था के संचालक चंदन, विकास सिंह, कार्यालय प्रभारी अशोक कुमार सहित बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक और स्थानीय लोग उपस्थित थे।
Sun. Jul 26th, 2026

शोध में दावा: भारत में 40 से 70 उम्र के लोगों को कोरोना का खतरा ज्यादा

नई दिल्ली. दुनियाभर में तेजी से बढ़ते कोरोना  संक्रमण के बीच वैज्ञानिक शोध में कई चौंकाने वाले मामले भी सामने आने लगे हैं. कोविड-19 वैश्विक महामारी के संबंध में अब तक के सबसे बड़े विश्लेषण में पाया गया है कि विकसित देशों की तुलना में भारत  में 40 वर्ष से 69 वर्ष तक की आयुवर्ग में कोरोना वायरस संक्रमण के अधिक मामले सामने आए हैं और मृतकों में भी इसी आयुवर्ग के अधिक लोग शामिल हैं. यह विश्लेषण करने वाले अनुसंधानकर्ताओं में आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु सरकार के अनुसंधानकर्ता भी शामिल हैं.

पत्रिका ‘साइंस’ में प्रकाशित अध्ययन के तहत, दोनों राज्यों में कोविड-19 के 84,965 पुष्ट मामलों के संपर्क में आए 5,75,071 लोगों में बीमारी के संक्रमण के तरीके का आकलन किया गया.

नई दिल्ली में ‘सेंटर फॉर डिजीज डायनेमिक्स, इकोनॉमिक्स एंड पॉलिसी’ के वैज्ञानिक आर लक्ष्मीनारायण समेत वैज्ञानिकों के समूह के अनुसार, इस अध्ययन के निष्कर्ष कम एवं मध्यम आय वाले देशों में महामारी फैलने के तरीके के बारे में जानकारी देते हैं.

वैज्ञानिकों ने आंकड़ों के आधार पर बताया कि अधिक आयु वाले देशों की तुलना में दोनों भारतीय राज्यों में युवकों में संक्रमण के अधिक मामले सामने आए हैं और मृतकों में भी युवक अधिक शामिल हैं. अध्ययन में कहा गया है कि समान आयु के संक्रमित लोगों के संपर्क में आने से संक्रमण का अधिक खतरा होता है. अनुसंधानकर्ताओं का कहना है कि ऐसा नवजात से 14 वर्ष के बच्चों एवं 65 वर्ष से अधिक आयु के लोगों में अधिक देखा गया है.
उन्होंने कहा कि संक्रमण के मामलों एवं मृतकों का अनुपात (सीएफआर) पांच वर्ष से 17 वर्ष के आयुवर्ग में 0.05 प्रतिशत और 85 वर्ष से अधिक आयु के लोगों में 16.6 प्रतिशत है. अनुसंधानकर्ताओं ने बताया कि दोनों राज्यों में मरीज मौत से पहले अस्पताल में औसतन पांच दिन रहे, जबकि अमेरिका में मरीज मौत से पहले करीब 13 दिन अस्पताल में रहे. आंध्र प्रदेश एवं तमिलनाडु भारत के उन राज्यों में शामिल हैं, जहां स्वास्थ्यकर्मियों की सर्वाधिक संख्या है और प्रति व्यक्ति सार्वजनिक स्वास्थ्य खर्च भी सबसे अधिक है.

मृतकों में 45 प्रतिशत मधुमेह से पीड़ित थे

अध्ययन में पाया गया है कि मृतकों में 63 प्रतिशत लोग ऐसे हैं, जो पहले से किसी एक गंभीर बीमारी से ग्रस्त थे और 36 प्रतिशत लोगों को पहले से दो या अधिक बीमारियां थीं. वैज्ञानिकों ने बताया कि मृतकों में से 45 प्रतिशत लोग मधुमेह से पीड़ित थे. लक्ष्मीनारायण ने कहा कि यह अध्ययन आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में संक्रमित लोगों के संपर्क में आए लोगों का पता लगाने के प्रयासों से संभव हुआ, जिसमें दोनों राज्यों के हजारों स्वास्थ्यसेवा कर्मियों ने मदद की.

सूत्रों के अनुसार

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