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आरपीएफ थाना प्रभारी कमलेश समादार सीबीआई के शिकंजे में, रिश्वतखोरी और अवैध वसूली के आरोपों की जांच तेज

चक्रधरपुर/राउरकेला: रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) में कथित भ्रष्टाचार और अवैध वसूली के मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए चक्रधरपुर रेल मंडल के राउरकेला आरपीएफ थाना प्रभारी कमलेश समादार को गिरफ्तार कर लिया है। इस कार्रवाई के बाद रेलवे सुरक्षा बल और रेल प्रशासन के विभिन्न विभागों में हलचल तेज हो गई है।

जानकारी के अनुसार, सीबीआई ने कुछ दिन पहले एक विशेष अभियान के दौरान अजय मिश्रा नामक व्यक्ति को 12 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया था। जांच एजेंसी का दावा है कि अजय मिश्रा कथित रूप से आरपीएफ अधिकारियों और अवैध वेंडरों के बीच बिचौलिए की भूमिका निभा रहा था। प्रारंभिक जांच में उसके तार थाना प्रभारी कमलेश समादार से जुड़े होने की बात सामने आने के बाद एजेंसी ने जांच का दायरा बढ़ाया।

सूत्रों के मुताबिक, पिछले कई महीनों से राउरकेला आरपीएफ थाना क्षेत्र में अवैध वेंडरों, छोटे कारोबारियों और रेलवे परिसरों में गतिविधियां संचालित करने वाले कुछ लोगों से नियमित वसूली किए जाने की शिकायतें विभिन्न स्तरों पर की जा रही थीं। इन शिकायतों के आधार पर सीबीआई ने गोपनीय तरीके से तथ्य जुटाने शुरू किए और पर्याप्त साक्ष्य मिलने के बाद आगे की कार्रवाई की गई।

बताया जाता है कि कमलेश समादार के खिलाफ जांच के दौरान कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आईं, जिसके बाद उनके विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की गई। सीबीआई की टीम जब उन्हें गिरफ्तार करने के लिए उनके सरकारी आवास पहुंची तो कुछ समय के लिए स्थिति तनावपूर्ण हो गई। परिवार के कुछ सदस्यों ने कार्रवाई का विरोध किया, लेकिन सीबीआई अधिकारियों ने न्यायालय से प्राप्त आदेश और कानूनी प्रक्रिया का हवाला देते हुए कार्रवाई जारी रखी। बाद में टीम ने उन्हें हिरासत में लेकर पूछताछ के लिए अपने साथ ले गई।

सीबीआई अब इस मामले को केवल एक रिश्वत प्रकरण तक सीमित न मानकर व्यापक भ्रष्टाचार नेटवर्क के रूप में जांच रही है। एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि अवैध वेंडरों से कथित वसूली का तंत्र कितने समय से संचालित हो रहा था, इसमें किन-किन लोगों की भूमिका थी और अवैध रूप से एकत्र की गई राशि का उपयोग किस प्रकार किया जाता था। जांचकर्ताओं द्वारा दस्तावेजों, बैंकिंग लेन-देन, मोबाइल कॉल रिकॉर्ड और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की भी पड़ताल की जा रही है।

रेलवे सूत्रों का कहना है कि इस कार्रवाई के बाद आरपीएफ के भीतर भी सतर्कता बढ़ा दी गई है। कई अधिकारियों और कर्मचारियों से पूछताछ किए जाने की संभावना जताई जा रही है। वहीं सीबीआई अधिकारियों का मानना है कि गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के दौरान और भी महत्वपूर्ण नाम सामने आ सकते हैं, जिससे रेलवे परिसरों में कथित रूप से चल रहे भ्रष्टाचार और अवैध वसूली के नेटवर्क का बड़ा खुलासा हो सकता है।

 

फिलहाल सीबीआई मामले की गहन जांच में जुटी हुई है और आने वाले दिनों में इस प्रकरण में और गिरफ्तारियां या अन्य कार्रवाई होने से इनकार नहीं किया जा सकता। इस पूरे घटनाक्रम ने रेलवे सुरक्षा व्यवस्था और आरपीएफ की कार्यप्रणाली को लेकर भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

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