जमशेदपुर: भुइयांडीह क्षेत्र के कल्याणनगर और इंद्रानगर बस्ती में प्रस्तावित अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई को लेकर जमशेदपुर पूर्वी की विधायक पूर्णिमा साहू ने गुरुवार को उपायुक्त राजीव रंजन से मुलाकात कर प्रभावित परिवारों के पक्ष को मजबूती से रखा। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के आदेश का पालन अपनी जगह आवश्यक है, लेकिन हजारों लोगों को बेघर करने से पहले उनके पुनर्वास की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करना भी प्रशासन की जिम्मेदारी है।
उपायुक्त कार्यालय में हुई बैठक के दौरान विधायक ने बस्तीवासियों की मौजूदगी में लगातार हो रही बारिश और संभावित विस्थापन से उत्पन्न मानवीय संकट का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में बिना वैकल्पिक व्यवस्था किए अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई उचित नहीं होगी। उनका आग्रह था कि प्रभावित परिवारों को राहत देते हुए पहले उनके पुनर्वास की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएं।
पूर्णिमा साहू ने बताया कि इस मामले में एनजीटी में 29 जुलाई को अंतिम सुनवाई पूरी हो चुकी है, लेकिन अब तक आदेश की प्रति सार्वजनिक नहीं हुई है। ऐसे में आदेश की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हुए बिना किसी प्रकार की जल्दबाजी उचित नहीं होगी। उन्होंने कहा कि आदेश उपलब्ध होने के बाद उसका विस्तार से अध्ययन किया जाएगा और उसके आधार पर आगे की रणनीति तय की जाएगी।
इस पर उपायुक्त राजीव रंजन ने आश्वस्त किया कि जिला प्रशासन भी एनजीटी के अंतिम आदेश की प्रति का इंतजार कर रहा है। आदेश प्राप्त होने और उसके विधिक परीक्षण के बाद ही नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत में विधायक ने कहा कि यह मामला वर्ष 2023 से लंबित है और प्रभावित परिवारों को समय-समय पर नोटिस जारी किए जाते रहे हैं। हाल में जारी नोटिस झारखंड पब्लिक लैंड इंक्रोचमेंट एक्ट की धारा-6 के तहत अंतिम नोटिस है। उन्होंने कहा कि अंतिम आदेश का विधिक परीक्षण कराया जाएगा और यदि जरूरत पड़ी तो बस्तीवासियों के हितों की रक्षा के लिए न्यायालय का भी रुख किया जाएगा। उनका कहना था कि कानून का पालन जरूरी है, लेकिन उसके साथ-साथ प्रत्येक प्रभावित परिवार के साथ न्याय और सम्मानजनक पुनर्वास भी सुनिश्चित होना चाहिए।
बैठक में विधायक प्रतिनिधि गुंजन यादव के साथ कल्याणनगर और इंद्रानगर बस्ती के प्रतिनिधि भी मौजूद रहे।

