रांची। झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) की हाल ही में आयोजित परीक्षा के संताली भाषा प्रश्नपत्र को लेकर उठे विवाद के बीच पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन की पुत्री एवं समाजसेवी दुखनी सोरेन के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने गुरुवार को राज्यपाल से शिष्टाचार मुलाकात कर अभ्यर्थियों की चिंताओं से अवगत कराया। प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल को ज्ञापन सौंपते हुए संताली भाषा के प्रश्नपत्र की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कराने और पूरे मामले पर पुनर्विचार कर न्यायोचित निर्णय लेने का आग्रह किया।
ज्ञापन में कहा गया है कि परीक्षा में शामिल बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों ने शिकायत की है कि संताली भाषा के प्रश्नपत्र में आधे से अधिक प्रश्न निर्धारित सिलेबस से बाहर पूछे गए थे। इससे स्थानीय एवं संताली भाषा के विद्यार्थियों को परीक्षा के दौरान कठिनाइयों का सामना करना पड़ा और चयन प्रक्रिया की निष्पक्षता को लेकर भी सवाल खड़े हुए हैं।
प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल से आग्रह किया कि पूरे मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराई जाए। यदि जांच में यह स्पष्ट होता है कि प्रश्न निर्धारित पाठ्यक्रम से बाहर थे, तो अभ्यर्थियों के हितों की रक्षा के लिए आवश्यक निर्णय लिया जाए, ताकि किसी भी योग्य अभ्यर्थी के साथ अन्याय न हो।
दुखनी सोरेन ने कहा कि झारखंड के युवाओं की मेहनत और भविष्य सर्वोपरि है। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य केवल विद्यार्थियों को न्याय दिलाना और यह सुनिश्चित करना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता एवं विश्वसनीयता बनी रहे। उन्होंने उम्मीद जताई कि राज्यपाल इस मामले में सकारात्मक पहल करते हुए अभ्यर्थियों के हित में उचित निर्णय सुनिश्चित करेंगे।
राज्यपाल से मुलाकात के दौरान प्रतिनिधिमंडल में सत्यानारायण मुर्मू, कार्तिक सोरेन, बुधेश्वर किस्कू तथा शंकर सेन महाली भी शामिल थे।

