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झींकपानी ACC सीमेंट प्लांट पर अनिश्चितता बरकरार, हजारों परिवारों के सामने रोजगार का संकट

चाईबासा: पश्चिमी सिंहभूम जिले के झींकपानी स्थित ACC सीमेंट प्लांट के भविष्य को लेकर क्षेत्र में चिंता और चर्चाएं लगातार बढ़ रही हैं। हालांकि कंपनी प्रबंधन की ओर से प्लांट बंद करने संबंधी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन पिछले कुछ महीनों से उत्पादन गतिविधियों में आई कमी के कारण मजदूरों, रैयतों, व्यापारियों और स्थानीय लोगों के बीच असमंजस की स्थिति बनी हुई है।

वर्ष 1946 में स्थापित झींकपानी स्थित ACC सीमेंट प्लांट जिले की सबसे पुरानी औद्योगिक इकाइयों में शामिल है। लंबे समय तक इसका संचालन ACC लिमिटेड द्वारा किया जाता रहा। बाद में कंपनी का स्वामित्व होल्सिम समूह के पास रहा और वर्ष 2022 में आदानी समूह द्वारा ACC तथा अंबुजा सीमेंट के अधिग्रहण के बाद इसका संचालन आदानी समूह के अधीन आ गया। करीब आठ दशकों से यह उद्योग पश्चिमी सिंहभूम की अर्थव्यवस्था, रोजगार और औद्योगिक विकास का प्रमुख आधार रहा है।

स्थानीय मजदूरों का कहना है कि पहले जहां नियमित रूप से उत्पादन और अन्य गतिविधियां संचालित होती थीं, वहीं वर्तमान में सप्ताह में केवल एक-दो दिन ही काम हो रहा है। इससे मजदूरों के सामने आर्थिक संकट गहराने लगा है। मजदूरों के अनुसार प्लांट से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े लगभग 1000 से 1500 श्रमिकों की आजीविका प्रभावित हो रही है। इसके अलावा परिवहन, लोडिंग-अनलोडिंग, होटल, किराना दुकान, छोटे व्यवसाय और अन्य सेवाओं से जुड़े हजारों परिवार भी इस उद्योग पर निर्भर हैं।

रैयतों का कहना है कि उनके पूर्वजों ने रोजगार और क्षेत्र के विकास की उम्मीद में कंपनी को अपनी जमीन दी थी। उनका आरोप है कि आदानी समूह के अधीन संचालन शुरू होने के बाद भूमि लीज नवीनीकरण और रैयतों से जुड़े मुद्दों पर कोई ठोस पहल नहीं की गई है। इससे स्थानीय लोगों में असंतोष बढ़ रहा है और भविष्य को लेकर चिंता बनी हुई है।

इधर क्षेत्र में यह चर्चा भी है कि प्लांट परिसर से मशीनरी और अन्य सामान धीरे-धीरे बाहर भेजे जा रहे हैं। कुछ स्थानीय सूत्रों का दावा है कि देर रात के समय प्लांट के उपकरण और सामग्री अन्य स्थानों पर भेजी जा रही है। हालांकि इस संबंध में कंपनी की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। वहीं मजदूरों का कहना है कि उन्हें प्लांट के संचालन या भविष्य की योजनाओं के बारे में किसी प्रकार की औपचारिक जानकारी नहीं दी गई है।

स्थानीय व्यापारियों के अनुसार प्लांट की गतिविधियां प्रभावित होने का असर बाजार पर भी दिखाई देने लगा है। मजदूरों और कर्मचारियों की आय में कमी आने से स्थानीय कारोबार प्रभावित हो रहा है। उनका कहना है कि यदि यही स्थिति लंबे समय तक बनी रही तो झींकपानी, चाईबासा और आसपास के क्षेत्रों की आर्थिक गतिविधियों पर व्यापक प्रभाव पड़ सकता है।

ACC बचाओ आंदोलन समिति के संयोजक रमेश बालमुचू ने कहा कि ACC झींकपानी केवल एक उद्योग नहीं, बल्कि पश्चिमी सिंहभूम की औद्योगिक विरासत और हजारों परिवारों की आजीविका का आधार है। उन्होंने कहा कि यदि प्लांट का संचालन पूरी तरह बंद होता है तो रोजगार, व्यापार, परिवहन और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर पड़ेगा।

वहीं पूर्व मंत्री एवं भाजपा के पूर्व प्रदेश उपाध्यक्ष बड़कुंवर गागराई ने कहा कि ACC सीमेंट फैक्ट्री का संचालन जनहित के लिए अत्यंत आवश्यक है और इस मुद्दे पर किसी प्रकार की राजनीति नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए ऐसा प्रतीत होता है कि राज्य सरकार की निष्क्रियता के कारण फैक्ट्री के संचालन से जुड़े मुद्दों का समाधान नहीं हो पा रहा है। उन्होंने विशेष रूप से भूमि लीज के मामले का उल्लेख करते हुए कहा कि रैयत अपनी जमीन देने के लिए तैयार हैं, लेकिन राज्य सरकार इस विषय पर गंभीरता नहीं दिखा रही है।

बड़कुंवर गागराई ने कहा कि यदि इस जनहित के मुद्दे पर राजनीति की जाती है तो भाजपा भी पीछे नहीं हटेगी। उन्होंने स्थानीय विधायक और मंत्री से मामले में हस्तक्षेप कर समाधान निकालने की मांग की। उन्होंने कहा कि लंबे समय से जनता को केवल आश्वासन दिए जा रहे हैं, जबकि अब स्थिति गंभीर होती जा रही है।

फिलहाल क्षेत्र के लोगों की निगाहें कंपनी प्रबंधन और सरकार के अगले कदम पर टिकी हुई हैं। लोगों की मांग है कि प्लांट की स्थिति को लेकर स्पष्ट जानकारी सार्वजनिक की जाए तथा इस ऐतिहासिक औद्योगिक इकाई और इससे जुड़े हजारों परिवारों के भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं।

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