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Fri. Apr 24th, 2026

कोल्हान से न्याय की पुकार, रांची तक पदयात्रा की तैयारी*

चाईबासा: तांबो चौक स्थित खुंटकट्टी मैदान में 24 अप्रैल को “नो एंट्री आंदोलन समिति, कोल्हान” की ओर से प्रेस वार्ता आयोजित की गई। इस दौरान समिति के संयोजक रमेश बालमुचू ने बताया कि 26 अप्रैल को आंदोलनकारी तांबो चौक, चाईबासा से राजधानी रांची स्थित मुख्यमंत्री आवास तक पदयात्रा करेंगे।

रमेश बालमुचू ने कहा कि 27 अक्टूबर 2025 को तांबा चौक में शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन किया गया था, लेकिन आंदोलनकारियों पर झूठे आरोप लगाकर उन्हें फंसाया गया।

उन्होंने बताया कि सैकड़ों की संख्या में लोग न्याय की मांग को लेकर रांची जाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि यदि परिवहन मंत्री सड़कों पर “नो एंट्री” नियम लागू कर दें और आंदोलनकारियों से वार्ता कर लें, तो आंदोलन को यहीं समाप्त किया जा सकता है।

प्रेस वार्ता में बताया गया कि कोल्हान क्षेत्र में सड़क दुर्घटनाओं को लेकर लोगों में आक्रोश है। सड़क हादसे में मृत चोकरो गोड़सोरा की पत्नी जोंगा गोड़सोरा अब भी न्याय के लिए संघर्ष कर रही हैं। उन्हें अब तक कोई उचित मुआवजा नहीं मिला है और दो छोटे बच्चों के साथ जीविकोपार्जन के लिए सड़क किनारे हड़िया बेचने को मजबूर हैं।

बताया गया कि इस आंदोलन की शुरुआत 19 अक्टूबर 2025 को कुजू में हुई सड़क दुर्घटना के बाद हुई थी, जब जोंगा गोड़सोरा ने रुंगटा कंपनी के पास सड़क पर 20 घंटे तक बैठकर न्याय की मांग की थी। इस घटना की तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हुई थी, जिसके बाद पूरे कोल्हान में “नो एंट्री” नियम लागू करने की मांग तेज हो गई।

आंदोलनकारियों का आरोप है कि शांतिपूर्ण आंदोलन के दौरान प्रशासनिक लापरवाही और कथित राजनीतिक कारणों से महिलाओं और बच्चों के साथ मारपीट की गई। इसके बाद 16 आंदोलनकारियों को जेल भेजा गया, 74 लोगों को नामजद किया गया और 500 अज्ञात ग्रामीणों पर प्राथमिकी दर्ज की गई, जिनमें अधिकांश स्थानीय आदिवासी शामिल हैं।

आंदोलन समिति का कहना है कि अब तक न “नो एंट्री” नियम लागू किया गया है, न पीड़ित परिवारों को न्याय मिला है और न ही दर्ज मामलों को वापस लिया गया है। इसी के विरोध में अब सैकड़ों लोग कोल्हान से रांची तक पदयात्रा करने जा रहे हैं।

आंदोलनकारियों की मुख्य मांगों में एमडीआर-177, एनएच-75ई और एनएच-220 पर भारी वाहनों के लिए समय आधारित “नो एंट्री” लागू करना, नियम का सख्ती से पालन कराना, निर्दोष ग्रामीणों पर दर्ज मुकदमे वापस लेना और सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम के लिए ठोस व्यवस्था करना शामिल है।

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