जमशेदपुर। राष्ट्रीय राइफल संघ भारत (एनआरएआई) द्वारा झारखंड राज्य राइफल संघ के सहयोग से आयोजित 7 दिवसीय राष्ट्रीय कोचिंग कोर्स का रविवार को सफल समापन हो गया। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम देश में शूटिंग खेलों को जमीनी स्तर पर मजबूत करने और वैज्ञानिक आधार पर कोचिंग प्रणाली विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हुआ।
इस गहन प्रशिक्षण कार्यक्रम में पांच राज्यों से कुल 33 कोचों ने भाग लिया, जिनमें झारखंड के 19 कोच शामिल रहे। बड़ी संख्या में स्थानीय कोचों की भागीदारी ने राज्य में शूटिंग खेलों के प्रति बढ़ती रुचि और संभावनाओं को स्पष्ट रूप से दर्शाया। कोर्स को इस तरह तैयार किया गया था कि इसमें तकनीकी दक्षता के साथ-साथ खेल विज्ञान, कोचिंग पद्धति और व्यावहारिक प्रशिक्षण को एक साथ जोड़ा जा सके, जिससे प्रतिभागियों को समग्र और उपयोगी अनुभव प्राप्त हो।
प्रशिक्षण के दौरान तकनीकी सत्रों का संचालन ओलंपियन एवं भारतीय टीम के कोच संजीव राजपूत और कोच विद्या जाधव ने किया। इन सत्रों में हथियारों के सुरक्षित संचालन, शूटिंग तकनीकों, त्रुटि सुधार और प्रतियोगिता की तैयारी जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं पर विस्तार से प्रशिक्षण दिया गया। इससे कोचों को अंतरराष्ट्रीय स्तर की तकनीकों और अनुभवों से सीधे सीखने का अवसर मिला।
कार्यक्रम की खास बात खेल विज्ञान पर विशेष जोर रहा। स्पोर्ट्स साइकोलॉजी सत्र में ननकी चड्ढा ने कोचों को मानसिक प्रदर्शन से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं जैसे लक्ष्य निर्धारण, तनाव प्रबंधन, आत्मविश्वास निर्माण और कोच-एथलीट के बीच प्रभावी संवाद की बारीकियां सिखाईं। वहीं न्यूट्रिशन विशेषज्ञ चार्वी बाजाज ने संतुलित आहार, हाइड्रेशन और रिकवरी के महत्व को विस्तार से समझाया, जिससे एथलीट के प्रदर्शन में निरंतरता लाई जा सके।
स्ट्रेंथ एंड कंडीशनिंग सत्र में विजेंद्र पाल सिंह ने शूटिंग खिलाड़ियों के लिए आवश्यक शारीरिक संतुलन, मुद्रा, मांसपेशीय सहनशक्ति और थकान प्रबंधन पर जोर दिया। इसके साथ ही उन्होंने वार्म-अप और कूल-डाउन की व्यावहारिक तकनीकों का प्रशिक्षण भी दिया। मानव शरीर रचना पर आयोजित सत्र में पी.एन. विनील कुमार ने बायोमैकेनिक्स, मांसपेशियों के उपयोग, शरीर की स्थिरता और संतुलन जैसे पहलुओं को विस्तार से समझाया, जिससे कोच तकनीकी त्रुटियों के पीछे छिपे शारीरिक कारणों को बेहतर ढंग से समझ सकें।
संचार कौशल पर आधारित सत्र में सलील श्रीवास्तव ने कोचों को प्रभावी संवाद, सक्रिय श्रवण, रचनात्मक फीडबैक और प्रेरणा के तरीकों से अवगत कराया। इस सत्र में यह बताया गया कि बेहतर संचार न केवल एथलीट के आत्मविश्वास को बढ़ाता है, बल्कि उनके प्रदर्शन और सीखने की क्षमता को भी मजबूत करता है।
कोर्स का समापन प्रतिभागियों की परीक्षा के साथ किया गया, जिसमें उनके ज्ञान और समझ का मूल्यांकन किया गया। इसके बाद सभी कोचों को फील्ड प्रोजेक्ट सौंपे गए हैं, जिन्हें उन्हें अगले दो महीनों में पूरा कर प्रस्तुत करना होगा। कोर्स का दूसरा चरण भी जमशेदपुर में ही आयोजित किया जाएगा, जहां प्रतिभागी अपने प्रोजेक्ट प्रस्तुत करेंगे और आगे की प्रशिक्षण प्रक्रिया पूरी करेंगे।
झारखंड स्टेट राइफल एसोसिएशन के अध्यक्ष दिवाकर सिंह ने इस अवसर पर कहा कि राज्य में इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रमों का नियमित आयोजन किया जाएगा, ताकि कोचों की गुणवत्ता में लगातार सुधार हो और शूटिंग खेलों को नई दिशा मिल सके।

