चाईबासा: पुलिस लाइन स्थित 174 बटालियन, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) में गुरुवार को सीआरपीएफ दिवस हर्षोल्लास के साथ मनाया गया।
कार्यक्रम की शुरुआत कमांडेंट मनोज डंग द्वारा शहीद स्मारक पर श्रद्धांजलि अर्पित कर की गई। उन्होंने देश की रक्षा में शहीद हुए जवानों को नमन किया। इसके बाद क्वार्टर गार्ड पर सलामी ली गई और गार्ड का निरीक्षण किया गया।
कार्यक्रम के दौरान कमांडेंट मनोज डंग ने अधिकारियों, अधीनस्थ अधिकारियों, जवानों और उनके परिजनों को सीआरपीएफ दिवस की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने बताया कि बल की स्थापना 27 जुलाई 1939 को मध्य प्रदेश के नीमच में क्राउन रिप्रेजेंटेटिव पुलिस के रूप में हुई थी। स्वतंत्रता के बाद 28 दिसंबर 1949 को संसद द्वारा अधिनियम पारित कर इसका नाम बदलकर केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल कर दिया गया। 19 मार्च 1950 को भारत सरकार द्वारा बल को उसका प्रतीक चिन्ह प्रदान किया गया, जिसके कारण हर वर्ष 19 मार्च को सीआरपीएफ दिवस मनाया जाता है।
उन्होंने बताया कि एक बटालियन से शुरू हुआ यह बल आज 250 से अधिक बटालियनों का विशाल संगठन बन चुका है, जिसमें करीब साढ़े तीन लाख जवान सेवाएं दे रहे हैं। सीआरपीएफ को विश्व का सबसे बड़ा अर्धसैनिक बल होने का गौरव प्राप्त है। बल ने पंजाब में आतंकवाद, उत्तर-पूर्व में उग्रवाद और जम्मू-कश्मीर में शांति व्यवस्था बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
वर्तमान में सीआरपीएफ छत्तीसगढ़, झारखंड, आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र सहित कई राज्यों में नक्सल विरोधी अभियानों में सक्रिय भूमिका निभा रहा है। इसके अलावा सांप्रदायिक दंगों, प्राकृतिक आपदाओं और अन्य आपात स्थितियों में भी बल ने अपनी जिम्मेदारी निभाई है। भारतीय संसद पर हमले जैसी घटनाओं और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संयुक्त राष्ट्र के तहत हैती, कोसोवो और लाइबेरिया में भी बल ने शांति स्थापना में योगदान दिया है।
कार्यक्रम में द्वितीय कमान अधिकारी जितेंद्र कुमार, द्वितीय कमान अधिकारी रजनीश कुमार, उप कमांडेंट धर्मेंद्र नारायण सिंह, सहायक कमांडेंट शांति किस्कू सहित 174वीं वाहिनी के अन्य अधिकारी और जवान उपस्थित रहे। कार्यक्रम का समापन बल के वीर जवानों को श्रद्धांजलि के साथ किया गया।

