चांडिल। सरायकेला-खरसावां जिले के चांडिल और आसपास के ग्रामीण इलाकों में लगातार बढ़ते हाथी आतंक को देखते हुए वन विभाग ने अब तकनीक का सहारा लिया है। ग्रामीणों की जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सोलर फेंसिंग परियोजना की शुरुआत कर दी गई है। यह प्रयास मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।
परियोजना की शुरुआत नीमडीह प्रखंड के रामनगर गांव से की गई है, जहां करीब एक किलोमीटर लंबा फेंसिंग कार्य पूरा कर ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है। इस सोलर फेंसिंग में 12 वोल्ट की बिजली संचालित तारें लगाई गई हैं, जो पूरी तरह सौर ऊर्जा से चलेंगी। तार के संपर्क में आते ही हाथियों को हल्का झटका महसूस होगा, जिससे वे गांव में घुसने से पहले ही वापस जंगल की ओर लौट जाएंगे। वन विभाग के अनुसार, इस झटके से हाथियों को किसी प्रकार की चोट या खतरा नहीं होगा।
वन विभाग ने इस तकनीक को काफी प्रभावी बताते हुए बताया कि जल्द ही इसे अन्य प्रभावित क्षेत्रों में भी विस्तार दिया जाएगा। अगले चरण में कुकड़ू प्रखंड के सिरुम, नीमडीह प्रखंड के लाकड़ी, बुरुडीह, गुंडा, ईचागढ़ के सालगाड़ीह, पिलीद, कुटाम और चांडिल प्रखंड के रसुनिया, हाथीनादा तथा कांगलाटांड में भी सोलर फेंसिंग लगाई जाएगी। इससे हजारों ग्रामीणों को सुरक्षा मिलने की उम्मीद है, जो अक्सर हाथियों के हमले, फसल बर्बादी और संपत्ति नुकसान से जूझते हैं।
चांडिल के रेंजर शशिप्रकाश रंजन ने बताया कि यह पहल पूरी तरह मानव और वन्यप्राणियों के बीच सुरक्षित दूरी बनाकर संरक्षण की भावना के साथ की जा रही है। सोलर फेंसिंग न केवल खेतों और घरों को सुरक्षा देगी, बल्कि हाथियों को भी सुरक्षित रूप से जंगल में रहने के लिए प्रेरित करेगी। उन्होंने ग्रामीणों से भी appealed किया कि वे इस व्यवस्था का समर्थन करें और फेंसिंग को क्षतिग्रस्त होने से बचाएं।
स्थानीय ग्रामीणों ने वन विभाग के इस कदम का स्वागत किया है। उनका कहना है कि यदि यह परियोजना सफल होती है, तो आने वाले दिनों में वे भयमुक्त होकर खेती और दैनिक जीवन जी सकेंगे।
इस नई पहल से उम्मीद बढ़ी है कि मानव और हाथियों के बीच संतुलन कायम रखते हुए क्षेत्र में शांति स्थापित की जा सकेगी।

