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चांदुडीह में युवक की संदिग्ध मौत पर हंगामा, पुलिस जांच की विश्वसनीयता पर उठे सवाल

चौका।सरायकेला-खरसावां जिले के चौका थाना क्षेत्र के चांदुडीह गांव में 21 वर्षीय युवक राहुल मंडल की संदिग्ध हालात में मौत के बाद स्थानीय लोगों और परिवार ने पुलिस पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए हैं। गुरुवार दोपहर दुकान के भीतर फांसी पर झूलते हुए राहुल का शव मिलने से पूरे इलाके में सनसनी फैल गई। बताया गया कि मरने से पहले उसने कथित तौर पर अपनी गर्लफ्रेंड को वीडियो कॉल पर पूरी घटना की जानकारी दी थी।

दुकान का शीशे का दरवाजा अंदर से बंद होने के बावजूद, ग्रामीणों का कहना है कि पुलिस के पहुंचने के बाद भी शव को परिजनों द्वारा उतार दिया गया, जिसे जांच प्रक्रिया का खुला उल्लंघन माना जा रहा है। घटना स्थल को सुरक्षित रखने में हुई इस चूक पर परिजन और ग्रामीण पुलिस की कार्यप्रणाली को कठघरे में खड़ा कर रहे हैं।

ग्रामीण और परिवारवालों ने सवाल उठाया है कि जब मौत संदिग्ध परिस्थितियों में हुई है, तब मजिस्ट्रेट को मौके पर बुलाना क्यों ज़रूरी नहीं समझा गया? क्रिमिनल प्रोसीजर कोड की धारा 174 के अनुसार पुलिस को मजिस्ट्रेट अथवा एसडीएम की मौजूदगी में मौके का निरीक्षण और फोरेंसिक तरीके से साक्ष्य संकलन करना आवश्यक होता है। लेकिन न तो मजिस्ट्रेट की उपस्थिति दर्ज हुई और न ही किसी वैज्ञानिक जांच टीम की।

राहुल की मोबाइल बातचीत से इस मामले में अंतरराज्यीय पहलू भी उभरकर सामने आया है। मृतक बंगाल के पुरुलिया जिले की एक युवती से संपर्क में था, जिससे ग्रामीणों का आरोप है कि झारखंड पुलिस पश्चिम बंगाल जाकर विस्तृत जांच करने में उदासीन दिख रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कॉल डिटेल रिकॉर्ड, वीडियो कॉल डेटा, डिजिटल फोरेंसिक और युवती का बयान इस जांच के प्रमुख आधार हैं, लेकिन पुलिस इन पहलुओं को गंभीरता से नहीं ले रही।

परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। उन्होंने निष्पक्ष जांच, कानूनी प्रावधानों के पालन और फोरेंसिक विशेषज्ञों की तैनाती की मांग की है। ग्रामीणों ने स्पष्ट रूप से कहा कि थाना स्तर पर प्रक्रिया की अनदेखी किए जाने की उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए, ताकि सच्चाई सामने आ सके और न्याय मिल सके।

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