चांडिल।सरायकेला-खरसावां जिला में आस्था और श्रद्धा के महापर्व छठ पूजा के दौरान चांडिल में हुई भीषण दुर्घटना ने पूरे क्षेत्र को शोक में डुबो दिया। सोमवार की शाम स्वर्णरेखा नदी के शहरबेड़ा छठ घाट पर संध्या अर्घ्य के समय श्रद्धालुओं के बीच अफरा-तफरी मच गई, जब एक नाबालिग बालक समेत तीन लोग नदी की गहराई में समा गए। लगातार दो दिनों तक चले राहत-बचाव अभियान के बाद मंगलवार शाम तक तीनों शव बरामद कर लिए गए। मृतकों की पहचान आदित्यपुर निवासी संजय यादव, प्रतीक यादव और डिमना बस्ती के नाबालिग आर्यन यादव के रूप में की गई है।जो सभी एक ही परिवार के हैं।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, डिमना बस्ती का रहने वाला आर्यन यादव अर्घ्य देने के दौरान नदी के गहरे हिस्से में चला गया। बच्चे को बचाने के लिए आदित्यपुर निवासी संजय यादव और प्रतीक यादव तुरंत नदी में कूद पड़े, लेकिन तेज़ बहाव और गहराई के कारण तीनों ही वापस नहीं लौट सके। देखते ही देखते घाट पर अफरा-तफरी मच गई। स्थानीय लोगों ने तुरंत पुलिस और प्रशासन को सूचना दी, जिसके बाद चांडिल थाना पुलिस, एनडीआरएफ टीम और स्थानीय गोताखोर मौके पर पहुंच गए और रेस्क्यू अभियान शुरू किया।
सोमवार देर रात आर्यन का शव बरामद कर लिया गया, जबकि मंगलवार सुबह एनडीआरएफ टीम ने संजय यादव का शव बाहर निकाला। तीसरे युवक प्रतीक यादव की तलाश मंगलवार शाम तक जारी रही। अंततः स्थानीय गोताखोरों की मेहनत रंग लाई और उन्होंने प्रतीक का शव भी नदी से निकाल लिया। इसके साथ ही तीनों शवों को बरामद कर चांडिल पुलिस ने पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। इस दौरान अनुमंडल पदाधिकारी विकास राय, थाना प्रभारी दिलशन बिरुआ समेत पूरा प्रशासनिक अमला मौके पर मौजूद था।
जिला प्रशासन ने बताया कि छठ पर्व को लेकर पहले से ही व्यापक तैयारी की गई थी। उपायुक्त नीतीश कुमार सिंह और पुलिस अधीक्षक मुकेश लुनायत ने जिले के सभी घाटों का निरीक्षण किया था। चांडिल क्षेत्र सहित प्रमुख घाटों पर ‘डेंजर जोन’ के बोर्ड लगाए गए थे, साथ ही लगातार माइकिंग कर लोगों से अपील की जा रही थी कि वे गहरे पानी में न उतरें। पुलिस बल, गोताखोर और स्वास्थ्य कर्मियों की भी तैनाती की गई थी।
इसके बावजूद कुछ श्रद्धालुओं ने चेतावनी की अनदेखी करते हुए निर्धारित सीमा से आगे बढ़ गए, जिससे यह हादसा हुआ। प्रशासन ने कहा है कि अगर लोग एहतियात बरतते तो यह त्रासदी टल सकती थी। जिला प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया कि भविष्य में केवल चेतावनी देने तक सीमित नहीं रहा जाएगा, बल्कि जो लोग सुरक्षा नियमों का उल्लंघन करेंगे, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
इस हादसे ने पूरे इलाके में शोक और मातम का माहौल पैदा कर दिया है। तीनों परिवारों के घरों में कोहराम मचा हुआ है। वहीं प्रशासन के लिए यह घटना आत्ममंथन का अवसर बन गई है। अधिकारियों का कहना है कि अब घाटों पर स्थायी सुरक्षा घेराबंदी, अतिरिक्त रोशनी की व्यवस्था, प्रशिक्षित गोताखोरों की स्थायी टीम और जन-जागरूकता अभियानों को और सशक्त किया जाएगा।

