कटरा। जम्मू-कश्मीर में पिछले कुछ दिनों से हो रही मूसलाधार बारिश ने जनजीवन को पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है। उफनती नदियों, तेज बहाव और भूस्खलन ने कई जिलों में भारी तबाही मचाई है। सबसे भीषण हादसा रियासी ज़िले की त्रिकुटा पहाड़ियों में हुआ, जहां वैष्णो देवी मंदिर जाने वाले रास्ते पर अर्धकुंवारी के पास अचानक भूस्खलन हो गया। इस हादसे में अब तक 30 श्रद्धालुओं की मौत हो चुकी है, जबकि कई लोग अब भी मलबे में फंसे हुए हैं। राहत और बचाव कार्य युद्धस्तर पर जारी है।
प्रशासन के मुताबिक इंद्रप्रस्थ भोजनालय के पास अचानक पहाड़ी से मलबा और विशालकाय पत्थर गिरने लगे, जिससे पैदल यात्रा मार्ग पूरी तरह अवरुद्ध हो गया। हादसे के समय बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस मार्ग पर मौजूद थे। स्थानीय पुलिस, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और सेना की टीमें तुरंत मौके पर पहुंचीं और बचाव अभियान शुरू किया। कई घायलों को कटरा और जम्मू के अस्पतालों में भर्ती कराया गया है, जिनमें से कुछ की हालत गंभीर बताई जा रही है।
एसएसपी रियासी परमवीर सिंह ने पुष्टि की है कि अब तक 30 लोगों के शव निकाले जा चुके हैं और मृतकों की संख्या बढ़ सकती है क्योंकि मलबे के नीचे दबे लोगों की तलाश जारी है। प्रशासन ने एहतियात के तौर पर वैष्णो देवी यात्रा को फिलहाल स्थगित कर दिया है।
इस प्राकृतिक आपदा का असर सिर्फ रियासी तक सीमित नहीं है। जम्मू और कश्मीर घाटी के अन्य हिस्सों में भी लगातार बारिश के कारण नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। कठुआ, डोडा, उधमपुर, किश्तवाड़ और पुंछ जिलों में हालात बेहद गंभीर बने हुए हैं। कई पुल बह चुके हैं, सड़कें टूट गई हैं और बिजली व दूरसंचार सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हुई हैं। जम्मू-श्रीनगर और किश्तवाड़-डोडा राष्ट्रीय राजमार्ग बंद कर दिए गए हैं, जबकि कई आंतरिक सड़कों पर भूस्खलन और जलजमाव से यातायात पूरी तरह रुका हुआ है।
कटुआ जिले में रावी नदी पर बने मोधोपुर बैराज का जलस्तर एक लाख क्यूसेक से ऊपर पहुंच गया है, जिससे निचले इलाकों में बाढ़ जैसी स्थिति उत्पन्न हो गई है। मौसम विभाग ने बताया है कि पिछले 24 घंटों में कठुआ में 155.6 मिमी, भद्रवाह में 99.8 मिमी, जम्मू में 81.5 मिमी और कटरा में 68.8 मिमी बारिश दर्ज की गई है। विभाग ने 27 अगस्त तक भारी बारिश, बादल फटने और भूस्खलन की चेतावनी जारी की है।
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने आपात बैठक बुलाकर सभी जिलों को हाई अलर्ट पर रहने और राहत कार्यों में कोई ढिलाई न बरतने के निर्देश दिए हैं। प्रभावित परिवारों को समय पर भोजन, पानी और दवाइयां उपलब्ध कराने के आदेश दिए गए हैं। प्रशासन ने एहतियातन 27 अगस्त तक जम्मू संभाग के सभी सरकारी और निजी स्कूल बंद रखने और कक्षा 10वीं व 11वीं की परीक्षाओं एवं भर्ती प्रक्रिया को स्थगित करने का फैसला किया है।
दूरसंचार सेवाएं ठप होने से राहत कार्यों में बाधा आ रही है, हालांकि तकनीकी टीमें उन्हें बहाल करने में जुटी हुई हैं। एनडीआरएफ ने जम्मू के प्रभावित इलाकों में नौकाएं तैनात कर दी हैं और कई परिवारों व छात्रों को सुरक्षित निकाला गया है।
प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें, जलाशयों और भूस्खलन संभावित क्षेत्रों से दूर रहें और सुरक्षित स्थानों पर शरण लें। राहत शिविरों में रहने वालों के लिए भोजन, दवाइयां और प्राथमिक चिकित्सा की व्यवस्था की जा रही है।
इस बीच, श्रद्धालुओं और स्थानीय नागरिकों में भारी निराशा और डर का माहौल है। सैकड़ों लोग अपने लापता परिजनों की तलाश में अस्पतालों और राहत शिविरों के चक्कर काट रहे हैं। यह आपदा एक बार फिर पहाड़ी क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे और आपदा प्रबंधन तंत्र की मजबूती की आवश्यकता को रेखांकित करती है।

