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Wed. Jul 22nd, 2026

प्रदर्शन की आड़ में पत्रकारों पर हमले से उठे सवाल, रिपोर्टिंग के दौरान मारपीट और बदसलूकी की घटनाओं की व्यापक निंदा

नई दिल्ली। देशभर में कॉकरोच जनता पार्टी के विरोध-प्रदर्शनों की कवरेज के दौरान पत्रकारों पर हुए कथित हमलों को लेकर मीडिया जगत में गहरी चिंता और नाराजगी देखने को मिल रही है। सोशल मीडिया पर पिछले एक दिन से कई वीडियो तेजी से वायरल हो रहे हैं, जिनमें ग्राउंड रिपोर्टिंग कर रहे प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया के पत्रकारों के साथ अभद्रता, मारपीट और धक्का-मुक्की की घटनाएं दिखाई दे रही हैं। इन घटनाओं ने पत्रकारों की सुरक्षा और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर गंभीर बहस छेड़ दी है।

वायरल वीडियो और सामने आई जानकारी के अनुसार कई महिला पत्रकारों के साथ कथित रूप से बदसलूकी की गई, जबकि कई पुरुष पत्रकारों को दौड़ा-दौड़ाकर पीटने, उनके कपड़े फाड़ने, मोबाइल फोन छीनने और कैमरे क्षतिग्रस्त करने जैसी घटनाएं भी सामने आई हैं। कई पत्रकारों ने आरोप लगाया कि वे केवल घटनास्थल की निष्पक्ष रिपोर्टिंग कर रहे थे, लेकिन उन्हें भीड़ के गुस्से का सामना करना पड़ा।

मीडिया संगठनों और वरिष्ठ पत्रकारों का कहना है कि लोकतंत्र में पत्रकारों की भूमिका केवल सूचना एकत्र कर उसे जनता तक पहुंचाने की होती है। किसी भी प्रदर्शन, आंदोलन या संवेदनशील घटना की निष्पक्ष रिपोर्टिंग लोकतांत्रिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। ऐसे में रिपोर्टिंग कर रहे पत्रकारों पर हमला न केवल व्यक्तिगत सुरक्षा पर हमला है, बल्कि सूचना के अधिकार और प्रेस की स्वतंत्रता पर भी गंभीर चोट माना जाएगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसी व्यक्ति, संगठन या समूह को किसी समाचार संस्थान, उसके संपादकीय निर्णय या किसी एंकर अथवा रिपोर्टर की रिपोर्टिंग पर आपत्ति है, तो उसके समाधान के लिए संविधान और कानून के तहत अनेक वैधानिक एवं लोकतांत्रिक माध्यम उपलब्ध हैं। शिकायत दर्ज कराना, कानूनी कार्रवाई करना, प्रेस परिषद या अन्य सक्षम संस्थाओं के समक्ष मामला उठाना अथवा शांतिपूर्ण विरोध दर्ज कराना ऐसे विकल्प हैं, जिनका सहारा लिया जा सकता है।

सामाजिक और मीडिया जगत से जुड़े लोगों का कहना है कि किसी भी आंदोलन की नैतिक शक्ति उसकी अहिंसक और लोकतांत्रिक प्रकृति में होती है। यदि आंदोलन के दौरान पत्रकारों पर हमले, हिंसा, तोड़फोड़ और गुंडागर्दी जैसी घटनाएं होती हैं, तो इससे आंदोलन की मूल भावना कमजोर होती है और उसका उद्देश्य भी सवालों के घेरे में आ जाता है।

पत्रकार संगठनों ने प्रशासन से मांग की है कि वायरल वीडियो और घटनाओं की निष्पक्ष जांच कर दोषियों की पहचान की जाए तथा पत्रकारों पर हमले के मामलों में कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। साथ ही भविष्य में किसी भी प्रदर्शन या संवेदनशील घटनास्थल पर रिपोर्टिंग करने वाले पत्रकारों की सुरक्षा के लिए प्रभावी व्यवस्था करने की भी मांग उठाई गई है।

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