जमशेदपुर। आनंदम पाठ चक्र के तत्वावधान में “अंतरराष्ट्रीय रवींद्र काव्य पाठ दिवस” गरिमापूर्ण वातावरण में आयोजित किया गया। इस अवसर पर विभिन्न भाषाओं के साहित्य एवं कविता प्रेमियों ने गुरुदेव रवींद्रनाथ ठाकुर की कविताओं का हिंदी, बंगाली और अंग्रेजी सहित विभिन्न भाषाओं में पाठ किया। साथ ही उनकी मूल बंगाली कविताओं के अंग्रेजी अनुवाद का भी प्रभावशाली वाचन किया गया।
कार्यक्रम का संचालन अल्पना भट्टाचार्य ने किया। कार्यक्रम का शुभारंभ अनिंदिता गुप्ता ने वैदिक मंत्रोच्चारण एवं स्वागत गीत से किया। इसके बाद सागरिका ने गुरुदेव की अंग्रेजी कविता का पाठ प्रस्तुत किया।
सामंत कुमार ने “प्रश्न”, आशीष गुप्ता ने खानिक काव्य से “अविनय”, डोला मुखर्जी ने सानाई काव्य संग्रह से “असंभव”, मलय आचार्य ने श्यामली से “हठात देखा”, मौसुमी घोष हाजरा ने श्यामली से “अफ्रीका”, शमिता रक्षित ने पलातका से “ठाकुर दादा की छुट्टी”, सुस्मिता गांगुली ने मानसी से “वर्षा के दिन”, आशीष बनर्जी ने परिशेष से “बांसुरी”, तथा सुमिता घोष ने “फिर आया है आषाढ़” का भावपूर्ण पाठ किया। इसके अतिरिक्त अन्ना गांगुली और तपती दत्त ने भी गुरुदेव की चुनिंदा कविताओं का प्रभावशाली वाचन किया।
पूरे कार्यक्रम के दौरान रवींद्रनाथ ठाकुर की काव्य-साधना, मानवीय संवेदनाओं और सार्वभौमिक विचारों की गूंज सुनाई दी। प्रतिभागियों के उत्कृष्ट काव्य पाठ ने उपस्थित श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
कार्यक्रम का उद्देश्य रवींद्र साहित्य की समृद्ध परंपरा को नई पीढ़ी और विभिन्न भाषाई समुदायों तक पहुंचाना था, जिसमें आयोजन पूर्णतः सफल रहा।

