Breaking
Fri. Sep 11th, 2026

कुचाई के रोलाहातु जंगल में पुलिस का बड़ा अभियान, भारी मात्रा में हथियार बरामद

सरायकेला। पश्चिम बंगाल में तीन इनामी माओवादियों के आत्मसमर्पण के एक दिन बाद सरायकेला-खरसावां जिले के नक्सल प्रभावित कुचाई क्षेत्र से बड़ी कार्रवाई की खबर सामने आई है। पुलिस सूत्रों के अनुसार सरायकेला-खरसावां पुलिस ने कोबरा और पश्चिम बंगाल पुलिस के सहयोग से कुचाई थाना क्षेत्र के रोलाहातु जंगल में संयुक्त तलाशी अभियान शुरू किया है। अभियान के दौरान जंगल से भारी मात्रा में हथियार और अन्य नक्सली सामग्री बरामद किए जाने की सूचना है। हालांकि अभियान अभी जारी रहने के कारण पुलिस ने बरामद सामान का विस्तृत ब्योरा सार्वजनिक नहीं किया है।

बताया जा रहा है कि इस अभियान का संबंध पश्चिम बंगाल में गुरुवार को आत्मसमर्पण करने वाले तीन वरिष्ठ माओवादियों से मिले इनपुट से है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक रीजनल कमेटी सदस्य रामप्रसाद मार्डी उर्फ सचिन, उसकी पत्नी एवं जोनल कमेटी सदस्य मीता उर्फ नयनतारा तथा सब-जोनल कमेटी सदस्य गौरी उर्फ बुल्लू ने पश्चिम बंगाल पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण किया है। सचिन पर झारखंड सरकार की ओर से 15 लाख रुपये और मीता पर 10 लाख रुपये का इनाम घोषित था। तीनों लंबे समय से झारखंड और पश्चिम बंगाल की सीमा से लगे इलाकों में सक्रिय बताए जाते रहे हैं।

रामप्रसाद मार्डी उर्फ सचिन का नाम पूर्व सांसद सुनील महतो हत्याकांड से भी जुड़ा रहा है। रिपोर्टों के अनुसार उक्त हत्याकांड के बाद से वह करीब दो दशक तक सुरक्षा एजेंसियों के रडार पर रहा। पुलिस रिकॉर्ड आधारित जानकारी में सचिन के खिलाफ 44, मीता के खिलाफ 19 और गौरी के खिलाफ 18 मामले दर्ज होने की बात सामने आई है। इन मामलों में मुठभेड़, आईईडी विस्फोट और सुरक्षा बलों पर हमले से जुड़े मामले शामिल बताए गए हैं।

सूत्रों के मुताबिक आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों से पूछताछ के दौरान मिले सुराग के आधार पर रोलाहातु जंगल में तलाशी अभियान शुरू किया गया। सुरक्षा बल जंगल के अंदर लगातार आगे बढ़कर तलाशी ले रहे हैं। बरामदगी में कितने हथियार, किस प्रकार के हथियार, गोला-बारूद या अन्य नक्सली सामग्री शामिल है, इसकी आधिकारिक जानकारी अभियान समाप्त होने के बाद ही सामने आने की संभावना है।

तीन वरिष्ठ माओवादियों के आत्मसमर्पण के तुरंत बाद कुचाई के जंगल में शुरू हुआ यह अभियान सुरक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यदि पुलिस आधिकारिक तौर पर बरामदगी को आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों से मिले इनपुट से जोड़ती है, तो झारखंड-पश्चिम बंगाल सीमा क्षेत्र में सक्रिय माओवादी नेटवर्क, उनके ठिकानों और हथियारों के संभावित डंप के संबंध में सुरक्षा बलों को अहम सुराग मिलने की उम्मीद है।

Related Post