जमशेदपुर: महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने और स्वरोजगार को बढ़ावा देने की दिशा में स्वावलंबी झारखण्ड माइक्रोवेलफेयर डेवलपमेंट सेंटर (एसजेएमडीसी) ने मंगलवार को 65 महिलाओं के बीच कुल ₹22 लाख का लघु ऋण वितरित किया। बिष्टुपुर स्थित तुलसी भवन के द्वितीय तल पर आयोजित संस्था के 14वें वार्षिक लघु ऋण वितरण समारोह में सामाजिक, औद्योगिक और विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े कई गणमान्य लोग मौजूद रहे।
समारोह के मुख्य अतिथि झारखंड सरकार के पूर्व मंत्री एवं पूर्व सांसद रवीन्द्र राय ने कहा कि समाज में स्थायी परिवर्तन बड़े आयोजनों से नहीं, बल्कि छोटे-छोटे और निरंतर प्रयासों से संभव होता है। उन्होंने स्वदेशी आंदोलन, सामाजिक एकता और आत्मनिर्भरता की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि जब तक समाज में गरीबी, असमानता और संघर्ष मौजूद हैं, तब तक सामाजिक सेवा की भूमिका महत्वपूर्ण बनी रहेगी।
रवीन्द्र राय ने दिवंगत समाजसेवी जगदीश सर्राफ के योगदान को याद करते हुए कहा कि सीमित संसाधनों के बावजूद उनके सतत प्रयास समाज के लिए प्रेरणास्रोत हैं। उन्होंने पंडित दीनदयाल उपाध्याय के विचारों का उल्लेख करते हुए रामायण के गिलहरी प्रसंग का उदाहरण दिया और कहा कि हर व्यक्ति अपनी क्षमता के अनुसार योगदान देकर समाज निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। उन्होंने विभिन्न स्वरोजगार योजनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि ऐसे सामाजिक प्रयास भविष्य में राष्ट्रीय नीतियों को भी दिशा देने का काम करते हैं।
विशिष्ट अतिथि और टाटा स्टील के वरीय अधिकारी राजेश राजन ने कहा कि टाटा समूह ने अपनी औद्योगिक यात्रा की शुरुआत से ही स्वदेशी भावना को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। उन्होंने कहा कि स्वदेशी जागरण मंच और स्वावलंबी झारखण्ड माइक्रोवेलफेयर डेवलपमेंट सेंटर महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में उसी विचार को आगे बढ़ा रहे हैं। उन्होंने इस पहल को समाज के लिए प्रेरणादायक और अनुकरणीय बताया।
झारखंड बिल्डर्स एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष कौशल सिंह ने संस्था की माइक्रोफाइनेंस परियोजना की सराहना करते हुए कहा कि यह महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।
खादी आयोग के पूर्व सदस्य एवं स्वावलंबी झारखण्ड के निदेशक मनोज कुमार सिंह ने बताया कि वर्ष 2012 में स्वदेशी जागरण मंच की प्रेरणा से इस पहल की शुरुआत जमशेदपुर में 50 महिलाओं को ₹10-10 हजार का लघु ऋण देकर की गई थी। उन्होंने कहा कि आज यह पहल एक व्यापक सामाजिक आंदोलन का रूप ले चुकी है और हजारों परिवार इससे लाभान्वित हो रहे हैं।
संस्था के निदेशक बंदेशंकर सिंह ने कहा कि परियोजना का उद्देश्य महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना और उन्हें साहूकारी व्यवस्था के शोषण से मुक्त कर कम ब्याज दर पर ऋण उपलब्ध कराना है, ताकि वे स्वरोजगार अपनाकर अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत कर सकें।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे मुरलीधर केडिया ने कहा कि यह परियोजना बिना किसी सरकारी भागीदारी के पूरी तरह सामाजिक सहयोग से संचालित हो रही है और जमशेदपुर में सामाजिक माइक्रोफाइनेंस का एक सफल मॉडल बन चुकी है। उन्होंने लाभार्थियों से अपील की कि वे ऋण का उपयोग केवल आयवर्धक और स्वरोजगार से जुड़ी गतिविधियों में करें तथा समय पर पुनर्भुगतान सुनिश्चित करें, ताकि अधिक से अधिक जरूरतमंद महिलाओं तक इस योजना का लाभ पहुंच सके।
समारोह के दौरान वक्ताओं ने स्वदेशी विचारधारा पर आधारित सामुदायिक सशक्तिकरण और सामाजिक माइक्रोफाइनेंस मॉडल की उपलब्धियों पर विस्तार से चर्चा की। कार्यक्रम में सामाजिक कार्यकर्ताओं, बुद्धिजीवियों, विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों और मीडिया कर्मियों की भी उल्लेखनीय उपस्थिति रही।
कार्यक्रम का स्वागत भाषण अशोक गोयल ने दिया। मंच संचालन अमित मिश्रा ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन पंकज सिंह ने प्रस्तुत किया। समारोह में रमेश हांसदा, जटाशंकर पांडे, मंजू ठाकुर, रामनारायण शर्मा, राजपति देवी, जेकेएम राजू, डॉ. अनिल राय, राजकुमार साह, मुरलीधर वर्णवाल, संगीता श्रीवास्तव, आभा सिंह, एम. भवानी, शारदा देवी, वनीता सहाय, अखिलेश सिंह, सुखदेव सिंह, विनय शर्मा, विश्वजीत पंडा, अभिषेक बजाज, अमर सिंह सहित बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

