धनबाद। टुंडी प्रखंड के गुलियाडीह गांव में जंगली हाथियों के झुंड ने सोमवार देर रात एक शिक्षक की जान ले ली। नया प्राथमिक विद्यालय, गुलियाडीह में सहायक शिक्षक के पद पर कार्यरत गिरजा मुरमू को हाथियों ने कुचल दिया, जिससे घटनास्थल पर ही उनकी मौत हो गई। घटना के बाद गांव में मातम पसरा है, वहीं लंबे समय से क्षेत्र में हाथियों की मौजूदगी को लेकर ग्रामीणों में वन विभाग के प्रति नाराजगी भी बढ़ गई है।
ग्रामीणों के अनुसार, टुंडी इलाके में करीब दो महीने से जंगली हाथियों का झुंड लगातार घूम रहा है। हाथियों के आबादी वाले क्षेत्रों के आसपास विचरण करने से ग्रामीणों में पहले से ही दहशत का माहौल था। ग्रामीणों का आरोप है कि हाथियों की गतिविधियों की जानकारी होने के बावजूद वन विभाग की ओर से लोगों की सुरक्षा के लिए पर्याप्त और प्रभावी इंतजाम नहीं किए गए। सोमवार रात शिक्षक गिरजा मुरमू की मौत के बाद ग्रामीणों का आक्रोश खुलकर सामने आ गया।
घटना की सूचना मिलने के बाद भी मंगलवार सुबह करीब आठ बजे तक प्रशासनिक अधिकारियों के मौके पर नहीं पहुंचने को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी देखी गई। ग्रामीणों का कहना है कि जब हाथियों का झुंड लंबे समय से इलाके में मौजूद था, तब संभावित खतरे को देखते हुए प्रभावित गांवों में सुरक्षा और जागरूकता के लिए पहले से ठोस व्यवस्था की जानी चाहिए थी।
मामले में धनबाद के डीएफओ विकास पालीवाल ने बताया कि घटना की सूचना मिलने के बाद वन विभाग की टीम को रात में ही घटनास्थल की ओर भेज दिया गया था और टीम मौके पर मौजूद है। उन्होंने ग्रामीणों से अपील की कि हाथियों के आबादी वाले क्षेत्र में आने की स्थिति में सबसे पहले अपनी सुरक्षा का ध्यान रखें। हाथियों के करीब जाने, उन्हें घेरने या खदेड़ने का प्रयास नहीं किया जाना चाहिए, क्योंकि इससे जान का खतरा बढ़ सकता है।
डीएफओ ने बताया कि हाथियों के कारण फसल या मकान को नुकसान होने पर सरकारी प्रावधान के तहत मुआवजा दिए जाने की व्यवस्था है। फिलहाल वन विभाग की टीम हाथियों के झुंड की गतिविधियों पर नजर रखते हुए उन्हें आबादी वाले क्षेत्र से दूर करने का प्रयास कर रही है। शिक्षक की मौत के बाद अब ग्रामीणों की मांग है कि हाथियों के लगातार विचरण वाले इलाकों में वन विभाग की निगरानी बढ़ाई जाए और संभावित मानव-हाथी संघर्ष को रोकने के लिए स्थायी स्तर पर प्रभावी कदम उठाए जाएं।

