जमशेदपुर। एमजीएम अस्पताल में कार्यरत बोड़ाम थाना क्षेत्र निवासी होमगार्ड जवान फूलकुमारी की आर्थिक और स्वास्थ्य संबंधी परेशानी की जानकारी मिलने के बाद पूर्व मंत्री सह भाजपा नेता दुलाल भुईयां ने झारखंड सरकार और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि बोड़ाम क्षेत्र उनकी पूर्व विधानसभा का हिस्सा रहा है और वहां के लोगों का दुख-दर्द वह भली-भांति समझते हैं। फूलकुमारी की स्थिति बेहद चिंताजनक है, लेकिन सरकार संवेदनहीन बनी हुई है।
दुलाल भुईयां ने कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन स्वयं आदिवासी समाज से आते हैं और हर मंच से आदिवासियों के उत्थान और अधिकारों की बड़ी-बड़ी बातें करते हैं, लेकिन हकीकत यह है कि आज आदिवासी समाज की बेटियां और बेटे अपने ही राज्य में उपेक्षित हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि फूलकुमारी भी आदिवासी समाज की महिला हैं, लेकिन महीनों से मानदेय नहीं मिलने के कारण वह अपना समुचित इलाज तक नहीं करा पा रही हैं। यह सरकार की कथनी और करनी के अंतर को उजागर करता है।
उन्होंने कहा कि यदि एक आदिवासी महिला अपनी मेहनत की कमाई के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हो, इलाज के अभाव में ऑपरेशन तक नहीं करा पा रही हो, तो यह सरकार की सबसे बड़ी विफलता है। मुख्यमंत्री को बताना चाहिए कि आदिवासी हितों की बात केवल भाषणों तक ही क्यों सीमित है। उन्होंने आरोप लगाया कि हेमंत सोरेन की सरकार ने आदिवासी समाज को केवल वादों और घोषणाओं में उलझाकर रखा है, जबकि जमीनी स्तर पर उनके जीवन में कोई सुधार नहीं दिख रहा है।
दुलाल भुईयां ने मुख्यमंत्री से अपील करते हुए कहा कि कम से कम फूलकुमारी जैसी पीड़ित महिला की आवाज सुनें। उन्होंने कहा कि राज्य में न जाने कितने होमगार्ड जवान, संविदाकर्मी और दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी महीनों से अपने मानदेय का इंतजार कर रहे हैं। उनके घर का चूल्हा जलाना मुश्किल हो गया है, बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है और बीमार होने पर इलाज तक संभव नहीं हो पा रहा है। सरकार यदि कुछ नहीं कर सकती तो कम से कम मेहनत की कमाई का भुगतान समय पर सुनिश्चित करे।
उन्होंने कहा कि किसी कर्मचारी को उसका मेहनताना समय पर मिलना उसका अधिकार है, एहसान नहीं। सरकार को अपनी प्राथमिकताएं तय करनी चाहिए और ऐसे कर्मचारियों का बकाया मानदेय तत्काल जारी करना चाहिए ताकि वे सम्मान के साथ अपना जीवन जी सकें।

