चाईबासा: जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, पश्चिमी सिंहभूम ने लंबित उपभोक्ता मामलों के निष्पादन में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। आयोग ने वर्ष 2024 तक दायर लगभग सभी उपभोक्ता मामलों का निस्तारण कर दिया है। वर्ष 2024 अथवा उससे पूर्व का केवल एक मामला लंबित है, जिसकी सुनवाई माननीय उच्च न्यायालय के स्थगन (स्टे) आदेश के कारण फिलहाल नहीं हो पा रही है।
आयोग के समक्ष अब वर्ष 2025 के 25 तथा वर्ष 2026 के 40 उपभोक्ता वाद लंबित हैं। इन मामलों के भी प्राथमिकता के आधार पर त्वरित निष्पादन की प्रक्रिया चल रही है। आयोग ने शेष मामलों के शीघ्र निस्तारण के लिए समयबद्ध कार्ययोजना तैयार की है।
जिला उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष सुनील कुमार सिंह ने बताया कि आयोग का उद्देश्य उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम में निर्धारित समय-सीमा के अनुरूप अधिक से अधिक मामलों का निष्पादन करना है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2025 में दायर मामलों के शीघ्र निस्तारण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है और भविष्य में भी इसी गति से कार्य जारी रहेगा।
सुनील कुमार सिंह तथा आयोग के सदस्य राजीव कुमार और देओश्री चौधरी ने आम उपभोक्ताओं से अपील की कि यदि उन्हें किसी सेवा में कमी, अनुचित व्यापार व्यवहार, दोषपूर्ण वस्तु, अधिक मूल्य वसूली अथवा उपभोक्ता अधिकारों के उल्लंघन जैसी समस्या का सामना करना पड़े तो वे बिना संकोच जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग में वाद दायर करें। उन्होंने कहा कि आयोग प्रत्येक उपभोक्ता को त्वरित, सुलभ और प्रभावी न्याय उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।
उन्होंने बताया कि यह उपलब्धि आयोग के सभी पदाधिकारियों एवं कर्मचारियों के सामूहिक प्रयास का परिणाम है। आयोग के सदस्य राजीव कुमार और देओश्री चौधरी भी पूरी निष्ठा, सहयोग और समर्पण के साथ कार्य कर रहे हैं, जिससे मामलों का गुणवत्तापूर्ण एवं समयबद्ध निष्पादन लगातार संभव हो रहा है।
आयोग की इस उपलब्धि से वर्षों से न्याय की प्रतीक्षा कर रहे उपभोक्ताओं को राहत मिली है। पुराने मामलों के निष्पादन से न केवल लंबित वादों का बोझ कम हुआ है, बल्कि उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के उद्देश्य के अनुरूप त्वरित एवं प्रभावी न्याय उपलब्ध कराने की दिशा में भी महत्वपूर्ण सफलता मिली है।
विधि विशेषज्ञों और न्यायिक क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि पुराने मामलों के लगभग पूर्ण निष्पादन से जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, पश्चिमी सिंहभूम ने कार्यकुशलता और न्यायिक प्रतिबद्धता का उदाहरण प्रस्तुत किया है। उनका कहना है कि इससे आम उपभोक्ताओं का न्याय व्यवस्था के प्रति विश्वास और मजबूत होगा तथा भविष्य में नए मामलों के शीघ्र निष्पादन का मार्ग भी प्रशस्त होगा।

