जमशेदपुर। साकची स्थित श्री श्री शीतला माता मंदिर परिसर बुधवार को श्रद्धा, भक्ति और वैदिक परंपराओं के दिव्य संगम का साक्षी बना। 15 जुलाई से 24 जुलाई 2026 तक आयोजित होने वाले नवकुंज नवरात्रि नवाहपरायण श्री लक्ष्मीनारायण महायज्ञ सह श्रीराम कथा का शुभारंभ 1001 महिलाओं की भव्य कलश यात्रा के साथ हुआ। पूरे क्षेत्र में वैदिक मंत्रोच्चार, जयघोष, भजन-कीर्तन और धार्मिक उत्साह का ऐसा वातावरण बना कि मंदिर परिसर पूरी तरह भक्तिमय हो उठा।
कार्यक्रम की शुरुआत प्रातःकाल पवित्र गंगा स्वरूप मानी जाने वाली स्वर्णरेखा नदी के तट से हुई, जहां वैदिक आचार्यों ने विधि-विधान से मंत्रोच्चार के बीच कलश पूजन कराया। इसके बाद महिलाओं ने कलश में पवित्र जल भरकर सिर पर धारण किया और पीले रंग के नववस्त्र पहनकर मंदिर की ओर प्रस्थान किया। सनातन परंपरा में पीला रंग मंगल, समृद्धि और भगवान विष्णु का प्रतीक माना जाता है, जबकि कलश को सृष्टि, शक्ति और जीवन का आधार माना जाता है। इसलिए कलश यात्रा को किसी भी धार्मिक अनुष्ठान का अत्यंत शुभ और मंगलकारी आरंभ माना जाता है।
शीतला माता मंदिर तक पहुंची इस भव्य यात्रा में विभिन्न देवी-देवताओं की आकर्षक झांकियां, बैंड-बाजे और धार्मिक धुनों ने श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक भाव से सराबोर कर दिया। मार्ग में श्रद्धालु “जय श्रीराम”, “हर-हर महादेव” और “जय माता दी” के जयघोष करते हुए आगे बढ़ते रहे। श्रद्धालुओं ने जगह-जगह पुष्पवर्षा कर कलश यात्रा का स्वागत किया।
इस अवसर पर मानगो की महापौर सुधा गुप्ता मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं। उन्होंने मंदिर पहुंचकर पूजा-अर्चना की तथा यज्ञ में आहुति अर्पित कर क्षेत्र की सुख-समृद्धि, शांति और जनकल्याण की कामना की।
आयोजकों ने बताया कि 24 जुलाई तक चलने वाले इस धार्मिक महोत्सव में प्रतिदिन वैदिक मंत्रोच्चार के साथ श्री लक्ष्मीनारायण महायज्ञ, श्रीराम कथा, हवन, पूजन एवं विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन होगा। विद्वान कथावाचकों द्वारा श्रीराम के आदर्श जीवन, धर्म, मर्यादा, सत्य और मानव कल्याण के संदेशों का विस्तार से वर्णन किया जाएगा। साथ ही महायज्ञ के माध्यम से विश्व शांति, समाज में सद्भाव, पर्यावरण की शुद्धि तथा समस्त जीवों के कल्याण की कामना की जाएगी।
सनातन संस्कृति में यज्ञ और रामकथा केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि समाज को नैतिकता, सेवा, करुणा और संस्कारों से जोड़ने का माध्यम माने जाते हैं। ऐसी मान्यता है कि यज्ञ से वातावरण शुद्ध होता है, सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और समाज में एकता एवं आध्यात्मिक चेतना का विस्तार होता है। वहीं श्रीराम कथा व्यक्ति को धर्म, कर्तव्य, आदर्श जीवन और पारिवारिक मूल्यों का संदेश देती है।
आयोजकों ने नगरवासियों से इस दस दिवसीय धार्मिक आयोजन में अधिक से अधिक संख्या में शामिल होकर धर्म लाभ प्राप्त करने तथा श्रीराम कथा एवं महायज्ञ के पुण्यफल के सहभागी बनने का आह्वान किया। पूरे आयोजन को लेकर मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं के बीच गहरा उत्साह और भक्ति का वातावरण देखने को मिल रहा है।

