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झारखंड में कानून व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त, सरकार हर मोर्चे पर विफल : बाबूलाल मरांडी

चाईबासा। झारखंड के प्रथम मुख्यमंत्री एवं विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने मंगलवार को पश्चिमी सिंहभूम जिले के मेघाहातुबुरू स्थित सेल (SAIL) गेस्ट हाउस में हेमंत सोरेन सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि राज्य में कानून व्यवस्था पूरी तरह चरमरा चुकी है और सरकार हर मोर्चे पर विफल साबित हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि अपराध लगातार बढ़ रहे हैं, जबकि पुलिस जनता की सुरक्षा सुनिश्चित करने के बजाय अवैध कारोबार से वसूली में व्यस्त है।

मरांडी ने कहा कि झारखंड में लोगों के बीच भय का माहौल है। खुलेआम हत्याएं हो रही हैं, लेकिन अपराधियों में कानून का कोई डर नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस का ध्यान अपराध नियंत्रण पर नहीं, बल्कि कोयला और बालू के अवैध कारोबार से वसूली करने पर केंद्रित है। उन्होंने कहा कि राज्य में शासन व्यवस्था पूरी तरह पटरी से उतर चुकी है और आम जनता खुद को असुरक्षित महसूस कर रही है।

अवैध बालू खनन का मुद्दा उठाते हुए नेता प्रतिपक्ष ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर सीधा निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि पूरे राज्य में अवैध बालू का कारोबार धड़ल्ले से चल रहा है और इसकी काली कमाई से सत्ता के शीर्ष पर बैठे लोग अपनी तिजोरियां भर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार जनहित के बजाय भ्रष्टाचार को संरक्षण देने में लगी हुई है।

मरांडी ने राज्य की शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि पढ़े-लिखे युवा रोजगार के लिए भटक रहे हैं, सरकारी व्यवस्थाएं बदहाल हैं और गरीब जनता मूलभूत सुविधाओं के अभाव में परेशान है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार विकास कार्यों के बजाय भ्रष्टाचार में डूबी हुई है।

पश्चिमी सिंहभूम में डिस्ट्रिक्ट मिनरल फाउंडेशन ट्रस्ट (DMFT) के फंड में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए उन्होंने इसकी निष्पक्ष जांच कराने की मांग की। उनका कहना था कि खनिज संपदा से मिलने वाला पैसा जनता के विकास पर खर्च होने के बजाय उसकी बंदरबांट की जा रही है।

मेघाहातुबुरू में आयोजित कार्यक्रम के दौरान आदिवासी ‘हो’ समाज युवा महासभा की केंद्रीय समिति ने राष्ट्रीय संगठन सचिव गोपी लागुरी के नेतृत्व में बाबूलाल मरांडी को एक स्मरण पत्र भी सौंपा। ज्ञापन के माध्यम से महासभा ने ‘हो’ भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने तथा आदिवासियों के लिए अलग सरना धर्म कोड लागू कराने की मांग केंद्र सरकार तक पहुंचाने का आग्रह किया।

इस अवसर पर गोपी लागुरी ने कहा कि ‘हो’ समाज अपनी भाषा और धार्मिक पहचान को संवैधानिक मान्यता दिलाने के लिए लंबे समय से संघर्ष कर रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि केंद्र सरकार इन मांगों पर सकारात्मक पहल करेगी। महासभा ने यह भी कहा कि इन मुद्दों को संसद के दोनों सदनों में कई बार उठाया जा चुका है और अब ठोस निर्णय लिए जाने की आवश्यकता है।

कार्यक्रम में पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा, पूर्व सांसद गीता कोड़ा, पूर्व मंत्री बड़कुंवर गागराई, जे.बी. तुबिद, मंगल गिलुवा, अजीत सिंह, महेंद्र महाकुंड, श्याम गुप्ता, संजीव सिंह, नीरज राम, कनक मिश्रा, बंटी सरदार, वीरेंद्र मिश्रा, गोपी लागुरी, राजेश करजी, जावेद अख्तर, आसना बिरुवा, कमल किशोर सिरका, माधव चंद्र कोड़ा, उम्लन हेस्सा, धनुर्जय लागुरी, संतोष पांडा सहित बड़ी संख्या में भाजपा नेता, कार्यकर्ता, ग्रामीण एवं ‘हो’ समाज के प्रतिनिधि मौजूद रहे।

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