जमशेदपुर। सामाजिक संस्था “अन्वेषा” की ओर से रविवार को कविगुरु रवींद्रनाथ टैगोर की जयंती के अवसर पर “प्रतिक्षण रवींद्रनाथ” कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर साहित्य, संगीत और संस्कृति के माध्यम से गुरुदेव को भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की गई।
कार्यक्रम की शुरुआत प्रभात फेरी से हुई। यह प्रभात फेरी सोनारी से आरंभ होकर कदमा और साकची के विभिन्न मार्गों से गुजरते हुए पुनः सोनारी पहुंचकर संपन्न हुई। प्रभात फेरी के दौरान प्रतिभागियों ने कविगुरु के विचारों और सांस्कृतिक विरासत का संदेश लोगों तक पहुंचाया।
संस्था की संस्थापक सचिव अल्पना भट्टाचार्य ने बताया कि रवींद्रनाथ टैगोर का संथाल समुदाय और उनकी संस्कृति से विशेष जुड़ाव रहा था। उन्होंने अपने जीवन का एक महत्वपूर्ण समय संथाली समाज के बीच बिताया, जिसका प्रभाव उनके साहित्य और रचनाओं में भी स्पष्ट रूप से दिखाई देता है।
सांस्कृतिक कार्यक्रम में बच्चों ने रवींद्रनाथ टैगोर के बंगला और संथाली गीतों पर मनमोहक नृत्य प्रस्तुत कर दर्शकों की खूब सराहना बटोरी। प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम में मौजूद लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया और पूरे वातावरण को सांस्कृतिक रंगों से भर दिया।
इस आयोजन में जमशेदपुर तथा बोड़ाम आनंदम पाठ्यचक्र द्वारा संचालित स्वामी विवेकानंद विद्यापीठ के छात्र-छात्राओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। विद्यार्थियों ने अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से कविगुरु के साहित्यिक और सांस्कृतिक योगदान को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया।
कार्यक्रम में अल्पना भट्टाचार्य, मीतू कुमारी, बीटीपी दासगुप्त, काकोली तरफदार, दयामय बाउरी, सुतपा बाउरी, निवेदिता बाउरी, गायत्री बाउरी समेत कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे। सभी ने कविगुरु रवींद्रनाथ टैगोर के बहुआयामी योगदान को याद करते हुए उनके आदर्शों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की आवश्यकता पर बल दिया।

