Breaking
Wed. May 6th, 2026

जमशेदपुर में 22-23 मई को राष्ट्रीय पर्वत-नदी सम्मेलन, आयोजन समिति की बैठक में विभागों का गठन और जिम्मेदारियां तय

जमशेदपुर। शहर में 22 और 23 मई को दो दिवसीय राष्ट्रीय पर्वत एवं नदी सम्मेलन का आयोजन किया जाएगा। यह सम्मेलन बिष्टुपुर स्थित Motilal Nehru Public School में आयोजित होगा, जहां देशभर से पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में कार्य कर रहे विशेषज्ञ, सामाजिक कार्यकर्ता और शोधकर्ता भाग लेंगे। सम्मेलन में नदियों और पहाड़ों की वर्तमान स्थिति, उनके संरक्षण और भविष्य की रणनीतियों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी।

इस आयोजन के मुख्य आयोजक Tarun Bharat Sangh और Yugantar Bharati हैं। इसके साथ ही भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (खनन), धनबाद, जल बिरादरी, नेचर फाउंडेशन, स्वर्णरेखा क्षेत्र विकास ट्रस्ट और मिशन वाई भी सहयोग कर रहे हैं। सम्मेलन का उद्घाटन 22 मई को सुबह 9 बजे होगा और यह शाम 6 बजे तक चलेगा, जबकि 23 मई को सुबह 9 बजे से प्रारंभ होकर अपराह्न ढाई बजे तक संपन्न होगा।

सम्मेलन के सफल संचालन के लिए एक व्यापक आयोजन समिति का गठन किया गया है। समिति के संरक्षक के रूप में जमशेदपुर पश्चिम के विधायक Saryu Roy और जल संरक्षण के क्षेत्र में देशभर में प्रसिद्ध Rajendra Singh को जिम्मेदारी सौंपी गई है। कार्यक्रम के संयोजक पर्यावरणविद दिनेश मिश्र बनाए गए हैं, जबकि अंशुल शरण सह-संयोजक हैं। आयोजन समिति के अध्यक्ष मनोज कुमार सिंह हैं। समिति में प्रो. अमर कुमार सिंह, बंदे शंकर सिंह, मुकुल मिश्रा, शिवपूजन सिंह, धर्मेंद्र प्रसाद, राम नारायण शर्मा, सुर रंजन राय, कुलविंदर सिंह पन्नू, चंद्रशेखर राव, अजय सिन्हा, प्रकाश कोया, राजेश प्रसाद, रमेश कुंवर, निर्मल सिंह और पप्पू सिंह सहित कई लोग शामिल हैं।

कार्यक्रम को व्यवस्थित ढंग से संचालित करने के लिए 14 विभाग बनाए गए हैं, जिनमें कार्यक्रम संचालन विभाग, पंजीकरण विभाग, आवास व्यवस्था विभाग, भोजन आपूर्ति विभाग, यातायात विभाग, कार्यक्रम स्थल साज-सज्जा विभाग, आमंत्रण विभाग, प्रचार-प्रसार विभाग, मीडिया समन्वय विभाग, अतिथि सत्कार विभाग, पेयजल एवं स्वच्छता विभाग, कार्यालय विभाग (प्रमाण पत्र, स्टेशनरी, स्मृति चिह्न, अंगवस्त्र आदि), सांस्कृतिक विभाग तथा छायांकन एवं वीडियोग्राफी विभाग शामिल हैं।

बिष्टुपुर में आयोजित बैठक में संरक्षक Saryu Roy ने कहा कि देश में अब तक नदियों और पहाड़ों के संरक्षण के लिए कोई ठोस और समर्पित कानून नहीं बन पाया है। उन्होंने कहा कि इस सम्मेलन का उद्देश्य एक ऐसा प्रारूप तैयार करना है, जिसे केंद्र सरकार के समक्ष प्रस्तुत किया जा सके। यदि यह प्रारूप स्वीकार होता है, तो भविष्य में नदियों और पहाड़ों के संरक्षण के लिए मजबूत कानूनी व्यवस्था संभव हो सकेगी। उन्होंने स्वर्णरेखा नदी की स्थिति का उल्लेख करते हुए कहा कि आज उसके पानी में ऑक्सीजन की मात्रा घटने से जलीय जीवों पर संकट उत्पन्न हो गया है।

उन्होंने बताया कि पहाड़ों की स्पष्ट परिभाषा नहीं होने के कारण कई व्यावहारिक समस्याएं सामने आती रही हैं। सर्वोच्च न्यायालय द्वारा हाल में पहाड़ की ऊंचाई को लेकर दिए गए निर्णय और उस पर आई प्रतिक्रियाओं का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में स्पष्ट और ठोस कानून बनना बेहद जरूरी है।

वहीं, पर्यावरणविद दिनेश मिश्र ने कहा कि “पहाड़ हैं, लेकिन अब दिखाई नहीं देते।” उन्होंने बताया कि सम्मेलन में तथ्य आधारित दस्तावेज तैयार किया जाएगा, जो हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में होगा, ताकि सरकार के समक्ष प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया जा सके और इस विषय पर ठोस पहल हो सके।

बैठक में सुधीर सिंह ने विषय प्रवेश कराया, जबकि मनोज कुमार सिंह ने सम्मेलन और आयोजन समिति की विस्तृत जानकारी दी। स्वर्णरेखा क्षेत्र विकास ट्रस्ट के ट्रस्टी अशोक गोयल ने धन्यवाद ज्ञापन किया। इस अवसर पर आशुतोष राय, अमरनाथ सिंह, प्रतिभा रानी मिश्रा, पवन सिंह, रवि ठाकुर, मंजू सिंह, विनोद सिंह, प्रवीण सिंह, शेषनाथ पाठक, संजीव मुखर्जी, देव कुमार, सुखदेव सिंह, पिंटू सिंह, तारक मुखर्जी, रणजीत प्रसाद, गोल्डन पांडेय, अतुल सिंह, नवनीत सिंह, नीरु सिंह, विकास साहनी, अजय कुमार, संतोष भगत, टुनटुन सिंह, सन्नी सिंह, संजय सिंह, बंदे शंकर सिंह, अनिल राय, विनीता साह, उषा यादव और विनीत कुमार सहित बड़ी संख्या में लोग उपस्थित थे।

Related Post