Breaking
Fri. Apr 24th, 2026

सतत गुणवत्ता इस्पात निर्माण पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का भव्य समापन, वैश्विक विशेषज्ञों ने साझा किए विचार

जमशेदपुर। शावक नानावती तकनीकी संस्थान (एसएनटीआई) में आयोजित “सतत गुणवत्ता इस्पात निर्माण पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन (आईसीएसक्यूएस-2026)” का सफल समापन 24 अप्रैल 2026 को वैलिडिक्टरी (समापन) समारोह के साथ संपन्न हुआ। यह दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन 23 और 24 अप्रैल 2026 को आयोजित किया गया था, जिसमें देश-विदेश के ख्यातिप्राप्त विशेषज्ञों, इस्पात उद्योग से जुड़े प्रतिनिधियों, तकनीकी वैज्ञानिकों तथा शोधकर्ताओं ने भाग लिया और इस्पात निर्माण के भविष्य पर गहन विचार-विमर्श किया।

समापन समारोह को टाटा स्टील के उपाध्यक्ष (सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं सततता) राजीव मंगल ने संबोधित किया। उन्होंने विशेष रूप से स्क्रैप आधारित मार्ग से इस्पात उत्पादन में सुरक्षा मानकों को मजबूत करने तथा गुणवत्ता आश्वासन की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में विद्युत आर्क भट्ठी (ईएएफ) और इंडक्शन भट्ठी (आईएफ) आधारित इस्पात निर्माण प्रणाली तेजी से विकसित हो रही है, ऐसे में उत्पादन प्रक्रिया में सुरक्षा, स्थिरता और गुणवत्ता नियंत्रण अत्यंत महत्वपूर्ण हो गया है।

कार्यक्रम के दौरान मंच पर टाटा स्टील के लॉन्ग प्रोडक्ट्स गुणवत्ता नियंत्रण प्रमुख डॉ. टी. भास्कर, जेमिपोल के मुख्य तकनीकी अधिकारी डॉ. एस. सान्याल तथा आईसीएसक्यूएस-2026 के सह-सचिव डॉ. ए. अम्मासी भी उपस्थित रहे। सभी वक्ताओं ने इस्पात उद्योग में तकनीकी नवाचार, पर्यावरणीय जिम्मेदारी और उत्पादन दक्षता को बढ़ाने पर अपने विचार साझा किए।

राजीव मंगल ने अपने संबोधन में टाटा स्टील द्वारा विद्युत आर्क भट्ठी आधारित उत्पादन प्रणाली की दिशा में हो रही प्रगति पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि यूरोप में इस्पात की मांग अपेक्षाकृत स्थिर होने के कारण वहां ईएएफ आधारित उत्पादन प्रणाली की ओर धीरे-धीरे बदलाव देखा जा रहा है, जबकि भारत में इस्पात की मांग तीव्र गति से बढ़ रही है। साथ ही, पर्यावरणीय मानकों को भी लगातार अधिक कठोर बनाया जा रहा है। ऐसे में भारत के लिए यह आवश्यक है कि ब्लास्ट फर्नेस और ईएएफ दोनों उत्पादन मार्गों का संतुलित विकास किया जाए, ताकि देश की बढ़ती मांग को पूरा करने के साथ-साथ सतत विकास के लक्ष्य भी प्राप्त किए जा सकें।

उन्होंने यह भी कहा कि इस्पात उद्योग को प्रतिस्पर्धा की बजाय सहयोगात्मक दृष्टिकोण अपनाना चाहिए, जिससे संपूर्ण मूल्य श्रृंखला में सुरक्षा, गुणवत्ता, ऊर्जा दक्षता और पर्यावरणीय स्थिरता को बढ़ावा मिल सके। इससे भारतीय इस्पात उद्योग वैश्विक स्तर पर और अधिक मजबूत और प्रतिस्पर्धी बन सकता है।

दो दिवसीय इस सम्मेलन का समापन एक फीडबैक सत्र के साथ हुआ, जिसमें प्रतिभागियों ने आयोजन को अत्यंत सफल, ज्ञानवर्धक और उद्योग के भविष्य के लिए उपयोगी बताया। पहले दिन उद्घाटन सत्र के साथ विभिन्न तकनीकी सत्र, मुख्य व्याख्यान और पैनल चर्चाओं का आयोजन किया गया, जिनमें सतत विकास की चुनौतियों, स्क्रैप की गुणवत्ता सुधार, इस्पात की शुद्धता, ऊर्जा दक्षता तथा विद्युत आर्क भट्ठी और इंडक्शन भट्ठी आधारित उत्पादन में कार्बन उत्सर्जन कम करने के उपायों पर विस्तार से चर्चा हुई।

दूसरे दिन तकनीकी सत्रों में भट्ठी तकनीक के आधुनिक विकास, कच्चे माल के बेहतर उपयोग, धातुकर्मीय प्रक्रिया नियंत्रण, डिजिटल तकनीक के उपयोग तथा उत्पादन प्रक्रिया के अनुकूलन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर गहन विचार-विमर्श किया गया। विशेषज्ञों ने इस्पात निर्माण में नवाचार और स्वचालन की भूमिका को भविष्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बताया और सतत विकास के लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए नई तकनीकों को अपनाने पर जोर दिया।

Related Post