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Thu. Apr 23rd, 2026

सतत इस्पात निर्माण पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का शुभारंभ, विशेषज्ञों ने ग्रीन स्टील और गुणवत्ता पर दिया जोर

जमशेदपुर।शहर में सतत और उच्च गुणवत्ता वाले इस्पात निर्माण को लेकर आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन (आईसीएसक्यूएस–2026) का गुरुवार को शावक नानावटी टेक्निकल इंस्टीट्यूट (एसएनटीआई) में भव्य उद्घाटन हुआ। 23 से 24 अप्रैल तक चलने वाले इस सम्मेलन में इलेक्ट्रिक आर्क भट्ठी (EAF) और इंडक्शन भट्ठी (IF) आधारित इस्पात उत्पादन के बदलते स्वरूप और नई तकनीकों पर विशेष मंथन हो रहा है। इस आयोजन को टाटा स्टील ने भारतीय धातु संस्थान (आईआईएम) जमशेदपुर चैप्टर, सीएसआईआर–राष्ट्रीय धातुकर्म प्रयोगशाला (एनएमएल) और ऑल इंडिया इंडक्शन फर्नेस एसोसिएशन (एआईआईएफए) के सहयोग से आयोजित किया है।

सम्मेलन के उद्घाटन अवसर पर मुख्य वक्ताओं ने अपने विचार रखते हुए इस्पात उद्योग के भविष्य को लेकर महत्वपूर्ण संकेत दिए। मुख्य गुणवत्ता आश्वासन, लॉन्ग प्रोडक्ट्स और आईसीएसक्यूएस–2026 के चेयरमैन डॉ. टी. भास्कर ने अपने संबोधन में कहा कि इलेक्ट्रिक आर्क और इंडक्शन भट्ठियों के माध्यम से सतत एवं गुणवत्तापूर्ण इस्पात उत्पादन आज की आवश्यकता बन चुका है। उन्होंने जोर देकर कहा कि पर्यावरणीय चुनौतियों के बीच उद्योग को तकनीकी रूप से अधिक सक्षम और जिम्मेदार बनना होगा।

मुख्य प्रौद्योगिकी अधिकारी डॉ. अतनु रंजन पाल ने इस आयोजन को उद्योग और शिक्षा जगत के बीच एक महत्वपूर्ण सेतु बताते हुए कहा कि धातुकर्म और मटेरियल साइंस के क्षेत्र में नई पीढ़ी को जागरूक करना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि इस तरह के मंच भविष्य की तकनीकी दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाते हैं और टाटा स्टील की नवाचार आधारित पहलों के अनुरूप हैं।

ऑल इंडिया इंडक्शन फर्नेस एसोसिएशन के अध्यक्ष योगेश मंधानी ने भारतीय इस्पात परिदृश्य में इंडक्शन फर्नेस की बढ़ती भूमिका पर प्रकाश डालते हुए नई तकनीकों को अपनाने की आवश्यकता बताई। उन्होंने प्राथमिक और द्वितीयक उत्पादकों के बीच बेहतर समन्वय को उद्योग की मजबूती के लिए अनिवार्य बताया।

वहीं, टाटा स्टील के वाइस प्रेसिडेंट (टेक्नोलॉजी, आरएंडडी एवं ग्राफीन) सुबोध पांडे ने ग्रीन स्टील ट्रांजिशन को लेकर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि भविष्य का इस्पात उद्योग स्वच्छता, अपशिष्ट प्रबंधन और लागत दक्षता पर आधारित होगा। उन्होंने वैश्विक प्रतिस्पर्धा, खासकर चीन में हो रहे तकनीकी विकास का जिक्र करते हुए भारतीय उद्योग को तेजी से अनुकूलन की जरूरत बताई।

सीएसआईआर–एनएमएल के निदेशक डॉ. संदीप घोष चौधरी ने स्क्रैप की गुणवत्ता से जुड़ी चुनौतियों को रेखांकित करते हुए कहा कि EAF और IF तकनीकों के बढ़ते उपयोग के साथ ट्रैम्प एलिमेंट्स की समस्या गंभीर होती जा रही है, जिसे नियंत्रित करना उद्योग के लिए बड़ी चुनौती है।

इस सम्मेलन में देश-विदेश से आए 200 से अधिक विशेषज्ञ, शोधकर्ता और उद्योग प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं। कार्यक्रम के दौरान विभिन्न तकनीकी सत्रों में फर्नेस तकनीक, स्क्रैप प्रबंधन, प्रोसेस कंट्रोल, डिजिटलाइजेशन और सतत विकास जैसे विषयों पर गहन चर्चा की जा रही है। यह सम्मेलन आने वाले समय में स्वच्छ, टिकाऊ और उच्च गुणवत्ता वाले इस्पात उत्पादन की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाला माना जा रहा है।

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