चाईबासा: तांतनगर प्रखंड के चिटीमिटी गांव में स्थानीय लोक संस्कृति और आस्था का प्रतीक चिटीमिटी चैत्र संक्रांति मेला 14 और 15 अप्रैल 2026 से शुरू हो गया है। मेले को लेकर सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। इस दो दिवसीय मेले में क्षेत्र के लोगों में खासा उत्साह देखा जा रहा है।
मेले में विभिन्न प्रकार की दुकानें सज गई हैं, जिनमें होटल, झूले, मनोरंजन के साधन, खेल, डांस शो, ड्रामा शो, हड़िया दुकान, साज-श्रृंगार और कॉस्मेटिक्स की दुकानें शामिल हैं। दूर-दराज से आने वाले लोगों के लिए भी विशेष इंतजाम किए गए हैं।
गांव के बुजुर्गों के अनुसार इस मेले की शुरुआत करीब 100 साल पहले वर्ष 1913 में फूलचंद राम ने की थी। इसके बाद उनके विधायक बेटे कैलाश राम और शिव प्रसाद राम ने इस परंपरा को आगे बढ़ाया। तब से यह मेला हर साल श्रद्धा और परंपरा के साथ आयोजित किया जाता है।
मेले का सबसे बड़ा आकर्षण भक्तों द्वारा आस्था का अनोखा प्रदर्शन है। इसमें श्रद्धालु पीठ की चमड़ी में हुक फंसाकर कई बैलगाड़ियों को एक साथ खींचते हैं। इसके अलावा कुछ लोग जीभ और गाल में लोहे के तार आरपार कर अपनी आस्था प्रकट करते हैं, जिसे देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग जुटते हैं।
मेले की शुरुआत शुभ घट और यात्रा घाट की परंपरा के साथ होती है। इसके बाद गोरियाभार घट का आयोजन किया जाता है। रात में पारंपरिक छऊ नृत्य का आयोजन होता है, जो मेले का मुख्य आकर्षण माना जाता है। मेले का समापन गोत्री पालट कार्यक्रम के साथ किया जाएगा।
इस मेले को देखने के लिए तांतनगर के अलावा मंझारी, कुमारडुंगी, सदर और झींकपानी समेत पूरे जिले से लोग पहुंचते हैं। स्थानीय लोगों का मानना है कि यह मेला क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान को जीवित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

