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Wed. Jun 24th, 2026

दिशोम गुरु शिबू सोरेन को मरणोपरांत पद्म भूषण, सिमरन भाटिया बोले— यह पूरे झारखंड के सम्मान का क्षण

जमशेदपुर: झारखंड आंदोलन के प्रमुख शिल्पकार और दिशोम गुरु शिबू सोरेन को मरणोपरांत देश के प्रतिष्ठित नागरिक सम्मान पद्म भूषण से सम्मानित किए जाने पर पूरे झारखंड में खुशी और गौरव का माहौल है। राज्य के राजनीतिक, सामाजिक और आदिवासी समुदायों के बीच इस सम्मान को झारखंड के लंबे संघर्ष, पहचान और अस्मिता की राष्ट्रीय स्तर पर मिली मान्यता के रूप में देखा जा रहा है।

राष्ट्रपति भवन में आयोजित सम्मान समारोह में शिबू सोरेन की पत्नी रूपी सोरेन ने उनकी ओर से पद्म भूषण ग्रहण किया। यह अवसर झारखंड के लोगों के लिए भावुक और ऐतिहासिक दोनों रहा।

इस उपलब्धि पर प्रतिक्रिया देते हुए झारखंड मुक्ति मोर्चा के युवा नेता सिमरन भाटिया ने गहरी प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि शिबू सोरेन का पूरा जीवन झारखंड की जनता के अधिकारों तथा जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए समर्पित रहा। उन्होंने दशकों तक संघर्ष कर राज्य की पहचान और आदिवासी समाज की आवाज को राष्ट्रीय मंच तक पहुंचाने का काम किया।

सिमरन भाटिया ने कहा कि मरणोपरांत मिला यह सम्मान शिबू सोरेन के त्याग, संघर्ष और जनसेवा को देश की ओर से दी गई सच्ची श्रद्धांजलि है। उनके योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता और आने वाली पीढ़ियां भी उनके संघर्षों से प्रेरणा लेती रहेंगी।

उन्होंने कहा कि यह सम्मान केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि पूरे झारखंड की जनता, राज्य के संघर्षपूर्ण इतिहास और यहां की सांस्कृतिक विरासत का सम्मान है। पद्म भूषण से सम्मानित किए जाने के बाद झारखंड के लोगों का गौरव और बढ़ा है तथा हर झारखंडी स्वयं को इस ऐतिहासिक क्षण का सहभागी महसूस कर रहा है।

सिमरन भाटिया ने विश्वास जताया कि शिबू सोरेन की विचारधारा और संघर्ष की विरासत आने वाले समय में भी समाज को दिशा देती रहेगी और झारखंड के विकास तथा अधिकारों की लड़ाई को नई ऊर्जा प्रदान करेगी।

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