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जुट के धागों से बदल रही जिंदगी, झुमरी तिलैया की महिलाएं लिख रहीं आत्मनिर्भरता की नई कहानी

कोडरमा। कभी घर की चारदीवारी और घरेलू जिम्मेदारियों तक सीमित रहने वाली महिलाएं आज अपने हुनर और मेहनत के दम पर आत्मनिर्भरता की नई मिसाल पेश कर रही हैं। कोडरमा जिले के झुमरी तिलैया स्थित इंदरवा मोहल्ले में महिलाओं का एक समूह जुट आधारित उत्पाद तैयार कर न केवल अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत कर रहा है, बल्कि प्लास्टिक मुक्त भारत के अभियान को भी मजबूती दे रहा है।

इस पहल का नेतृत्व कर रहीं राधा यादव के साथ करीब 20 महिलाएं जुड़ी हुई हैं। ये सभी महिलाएं रोजाना घरेलू कार्यों से समय निकालकर राधा यादव के आवास पर एकत्रित होती हैं और चार से पांच घंटे तक जुट से विभिन्न उपयोगी वस्तुओं का निर्माण करती हैं। इस कार्य ने महिलाओं को रोजगार का एक स्थायी माध्यम उपलब्ध कराया है, जिससे वे अपने परिवार की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

महिलाओं द्वारा तैयार किए जा रहे उत्पादों में जुट के झोले, बोतल बैग, फोल्डर फाइल, डायरी कवर, लैपटॉप बैग, वॉल बैग सहित कई अन्य आकर्षक और उपयोगी वस्तुएं शामिल हैं। पर्यावरण के अनुकूल होने के कारण जुट उत्पादों की मांग लगातार बढ़ रही है। खास बात यह है कि ये उत्पाद प्लास्टिक का प्रभावी विकल्प बनकर उभर रहे हैं, जिससे पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिल रहा है।

राधा यादव बताती हैं कि पहले समूह से जुड़ी अधिकांश महिलाएं केवल घरेलू कार्यों तक सीमित थीं। सामाजिक और पारिवारिक बंधनों के बीच उनके पास आर्थिक रूप से आगे बढ़ने के अवसर कम थे। लेकिन अब स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है। जुट उत्पाद निर्माण के माध्यम से महिलाएं न केवल अपनी आय अर्जित कर रही हैं, बल्कि आत्मविश्वास के साथ परिवार और समाज में अपनी अलग पहचान भी बना रही हैं।

महिलाओं की यह पहल महिला सशक्तिकरण का उत्कृष्ट उदाहरण बन गई है। अपनी लगन और मेहनत के बल पर वे आर्थिक रूप से मजबूत होने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण के अभियान में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं। जुट से बने उत्पादों को अपनाकर प्लास्टिक के उपयोग को कम किया जा सकता है, जिससे प्लास्टिक मुक्त भारत के लक्ष्य को हासिल करने में भी मदद मिलेगी।

झुमरी तिलैया की इन महिलाओं ने यह साबित कर दिया है कि यदि अवसर और संकल्प दोनों साथ हों तो घर की चौखट से निकलकर सफलता की नई इबारत लिखी जा सकती है। उनकी यह पहल न केवल आत्मनिर्भर भारत के सपने को साकार कर रही है, बल्कि समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत भी बन रही है।

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