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आत्महत्या रोकथाम को लेकर जागरूकता जरूरी, जिला प्रशासन देगा हरसंभव सहयोग : उपायुक्त

जमशेदपुर। मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने और आत्महत्या की घटनाओं की रोकथाम के उद्देश्य से कार्यरत संस्था ‘जीवन’ द्वारा आयोजित दो दिवसीय रिफ्रेशर प्रशिक्षण कार्यक्रम का शनिवार को शुभारंभ किया गया। बिष्टुपुर स्थित एसएनटीआई परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम का उद्घाटन पूर्वी सिंहभूम के उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी राजीव रंजन ने किया।

कार्यक्रम में शामिल होने से पहले उपायुक्त ने बिष्टुपुर के 25 क्यू रोड स्थित ‘जीवन केंद्र’ का दौरा किया और वहां उपलब्ध परामर्श सेवाओं तथा संस्था की कार्यप्रणाली की विस्तार से जानकारी प्राप्त की। उन्होंने संस्था के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि मानसिक स्वास्थ्य आज के समय की एक महत्वपूर्ण सामाजिक चुनौती है, जिससे निपटने के लिए समाज, प्रशासन और स्वयंसेवी संस्थाओं को मिलकर काम करना होगा।

राजीव रंजन ने कहा कि आत्महत्या रोकथाम का विषय केवल किसी एक संगठन की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह पूरे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि इस दिशा में जिला प्रशासन संस्था को हरसंभव सहयोग प्रदान करेगा ताकि अधिक से अधिक लोगों तक सहायता और परामर्श सेवाएं पहुंच सकें।

संस्था ‘जीवन’ के निदेशक डॉ. जे.आर. जेन ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए बताया कि वर्ष 2006 में स्थापित यह संस्था संकट की स्थिति से गुजर रहे लोगों को भावनात्मक सहयोग और परामर्श उपलब्ध कराने का कार्य कर रही है। उन्होंने बताया कि संस्था अंतरराष्ट्रीय संगठन Befrienders Worldwide, UK से संबद्ध है और आत्महत्या की रोकथाम के लिए लगातार सक्रिय भूमिका निभा रही है।

उन्होंने कहा कि वर्तमान प्रशिक्षण कार्यक्रम में 25 स्वयंसेवक भाग ले रहे हैं, जिन्हें संकटग्रस्त व्यक्तियों की पहचान, संवाद कौशल और भावनात्मक सहयोग से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर प्रशिक्षण दिया जा रहा है। संस्था ने आगामी वर्षों में आत्महत्या की घटनाओं में 50 प्रतिशत तक कमी लाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए हेल्पलाइन सेवाओं का विस्तार, चौबीसों घंटे उपलब्ध परामर्श सुविधा तथा व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाने की योजना बनाई गई है।

कार्यक्रम में संस्था के पदाधिकारी, प्रशिक्षक, स्वयंसेवक एवं अन्य आमंत्रित अतिथि मौजूद रहे। मानसिक स्वास्थ्य को लेकर सकारात्मक संवाद और संवेदनशील समाज के निर्माण की दिशा में इस पहल को महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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