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*कैट ने पेटीएम पेमेंट्स बैंक का लाइसेंस रद्द करने के आरबीआई के निर्णय का स्वागत किया-सुरेश सोंथालिया* *उपभोक्ताओं, छोटे व्यापारियों की सुरक्षा तथा डाटा सुरक्षा संबंधी मामलों की जांच की मांग*

25 अप्रैल जमशेदपुर

कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) द्वारा पेटीएम पेमेंट्स बैंक लिमिटेड का लाइसेंस रद्द करने के निर्णय का स्वागत करते हुए इसे जनहित में उठाया गया एक निर्णायक कदम बताया है। कैट ने कहा कि यह सख्त नियामकीय कार्रवाई उन करोड़ों भारतीयों की मेहनत की कमाई की सुरक्षा सुनिश्चित करेगी, जिन्होंने इस संस्था पर विश्वास कर अपना धन जमा किया था।

कैट के राष्ट्रीय संयुक्त महामंत्री सुरेश सोंथालिया ने कहा कि आरबीआई का यह निर्णय बार-बार नियामकीय नियमों की अनदेखी, प्रबंधन संबंधी विफलताओं तथा आरबीआई के निर्देशों की लगातार अवहेलना की गंभीरता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2024 में भी आरबीआई ने पेटीएम पेमेंट्स बैंक की बैंकिंग गतिविधियों पर बड़े प्रतिबंध लगाए थे, लेकिन चेतावनियों और सुधार के अवसरों के बावजूद संस्था आवश्यक सुधार करने में विफल रही, जिसके परिणामस्वरूप यह कार्रवाई करनी पड़ी।

सोंथालिया ने जमाकर्ताओं को लेकर आरबीआई द्वारा दी गई इस आश्वासन की सराहना की कि उनका धन सुरक्षित है और नियमानुसार उन्हें वापस मिलेगा। उन्होंने कहा कि यह आश्वासन विशेष रूप से उन लाखों छोटे व्यापारियों, दुकानदारों, रेहड़ी-पटरी वालों, स्वरोजगार से जुड़े लोगों और महिला उद्यमियों के लिए महत्वपूर्ण है, जो प्रतिदिन के लेनदेन और डिजिटल भुगतान के लिए बड़े पैमाने पर पेटीएम का उपयोग कर रहे थे।

कैट के चेयरमैन बृजमोहन अग्रवाल ने पहले भी आगाह किया था कि पेटीएम पेमेंट्स बैंक पर किसी भी नियामकीय कार्रवाई से बड़ी संख्या में सूक्ष्म और छोटे व्यापारियों को वित्तीय असुविधा तथा लेनदेन संबंधी बाधाओं का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए कैट ने संबंधित अधिकारियों से आग्रह किया है कि ऐसे उपभोक्ताओं और व्यापारियों को किसी प्रकार की परेशानी न हो, इसके लिए सुचारु संक्रमण व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

कैट के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री बी. सी. भरतिया ने पेटीएम के प्लेटफॉर्म के माध्यम से वर्षों में एकत्र किए गए विशाल वित्तीय एवं उपभोक्ता डाटा के प्रबंधन, भंडारण तथा उसके स्थान को लेकर व्यापक जांच की मांग की है। उन्होंने कहा कि चूंकि कंपनी में चीन से जुड़ी संस्था अलीबाबा सहित विदेशी निवेशकों की हिस्सेदारी रही है, इसलिए डाटा सुरक्षा, डाटा संप्रभुता तथा राष्ट्रीय हित से जुड़े सभी पहलुओं की गहन जांच आवश्यक है।

कैट ने कहा कि डिजिटल भुगतान आधुनिक व्यापार की रीढ़ है और फिनटेक प्लेटफॉर्म्स पर जनता का विश्वास किसी भी स्थिति में कमजोर नहीं होना चाहिए। आरबीआई की यह कार्रवाई स्पष्ट संदेश देती है कि कोई भी संस्था, चाहे उसका आकार या बाजार में प्रभाव कितना भी बड़ा क्यों न हो, नियामकीय नियमों का उल्लंघन कर या ग्राहकों के हितों की अनदेखी कर संचालन नहीं कर सकती।

सोंथालिया ने पुनः दोहराया कि वित्तीय नवाचार हमेशा पारदर्शिता, जवाबदेही और भारतीय कानूनों के पूर्ण अनुपालन के साथ ही आगे बढ़ना चाहिए। उपभोक्ताओं, व्यापारियों और राष्ट्रहित को सर्वोच्च प्राथमिकता मिलनी चाहिए।

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