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सुवर्णरेखा किनारे मिला 227 किलो का ‘अमेरिकन बम’ नष्ट, सेना के हाई-रिस्क ऑपरेशन से टला बड़ा खतरा

जमशेदपुर। पूर्वी सिंहभूम जिले के बहरागोड़ा प्रखंड अंतर्गत पानीपाड़ा-नागुडसाई गांव में सुवर्णरेखा नदी तट पर मिले दशकों पुराने शक्तिशाली बम को भारतीय सेना ने सफलतापूर्वक विस्फोट कर निष्क्रिय कर दिया। बुधवार को अंजाम दिए गए इस हाई-रिस्क ऑपरेशन के बाद पूरे इलाके ने राहत की सांस ली और ‘भारत माता की जय’ के नारों से माहौल गूंज उठा।

यह बम 227 किलोग्राम वजनी अमेरिकी एएन-एम 64 मॉडल का था, जिसे विशेषज्ञों ने अत्यंत खतरनाक और संवेदनशील स्थिति में बताया। सेना की 51 इंजीनियर रेजिमेंट (रांची) की विशेष टीम ने सूझबूझ और अत्याधुनिक तकनीक के सहारे इस खतरे को टाल दिया। ऑपरेशन का नेतृत्व लेफ्टिनेंट कर्नल धर्मेंद्र सिंह और कैप्टन आयुष कुमार सिंह ने किया, जबकि टीम में नायब सूबेदार आनंद स्वरूप सिंह, हवलदार कंवलदीप सिंह, हवलदार दलबीर सिंह, नायक सीएएस नौटियाल, लांस नायक मनोज और सैपर पंकज जैसे प्रशिक्षित विशेषज्ञ शामिल थे।

सेना के अधिकारियों के अनुसार, बम का अनियंत्रित विस्फोट बड़े इलाके में भारी तबाही मचा सकता था। इसे सुरक्षित तरीके से नष्ट करने के लिए बम को जमीन के अंदर करीब 10 फीट गहरे गड्ढे में रखा गया, ताकि विस्फोट की ऊर्जा नीचे की ओर नियंत्रित रहे। इसके चारों ओर बालू से भरी बोरियों का मजबूत घेरा बनाकर बंकर तैयार किया गया, जिससे छर्रे और मिट्टी बाहर न फैल सके। पूरी प्रक्रिया को एक किलोमीटर दूर बनाए गए ऑपरेशन सेंटर से नियंत्रित किया गया।

ऑपरेशन की गंभीरता को देखते हुए सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे। बम मिलने के बाद से ही पूरे इलाके को सील कर दिया गया था और एक किलोमीटर के दायरे में आम लोगों के प्रवेश पर रोक लगा दी गई थी। ग्रामीणों को सुरक्षित स्थानों पर भेजा गया, वहीं पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की तैनाती कर क्षेत्र की निगरानी की गई। यहां तक कि एहतियात के तौर पर कलईकुंडा एयरफोर्स स्टेशन से उड़ानों को अस्थायी रूप से रोक दिया गया था।

सेना ने मंगलवार से ही घटनास्थल का विस्तृत सर्वेक्षण शुरू कर दिया था। नदी के बहाव, मिट्टी की स्थिति और आसपास के भूगोल का गहन अध्ययन कर ऑपरेशन की रणनीति तैयार की गई। बुधवार को तय योजना के अनुसार विस्फोट कर बम को पूरी तरह नष्ट कर दिया गया, जिससे किसी प्रकार की जनहानि या संपत्ति का नुकसान नहीं हुआ।

गौरतलब है कि 17 मार्च को कुछ स्थानीय मछुआरे सुवर्णरेखा नदी में मछली पकड़ने गए थे, तभी उन्हें सिलेंडरनुमा एक भारी धातु की वस्तु दिखाई दी। शक होने पर उन्होंने तुरंत प्रशासन को सूचना दी, जिसके बाद जांच में यह खतरनाक बम निकला। सूचना मिलते ही प्रशासन हरकत में आया और सेना को बुलाया गया।

सफल ऑपरेशन के बाद मौके पर मौजूद ग्रामीणों और अधिकारियों ने सेना की टीम का तालियां बजाकर स्वागत किया। जिला प्रशासन, पुलिस और सेना के बेहतर समन्वय का ही परिणाम रहा कि इतने बड़े खतरे को बिना किसी नुकसान के टाल दिया गया। फिलहाल सेना की टीम इलाके में जांच कर रही है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि आसपास कहीं और कोई विस्फोटक अवशेष मौजूद न हो।

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