” सिविल मजदूर हो गये हैं बेरोजगार – अब होने लगी है हाहाकार, अब तो चेते सरकार – वर्ना सब होगा बेकार।”
– उक्त बातें पोटका के पूर्व जिलापार्षद करुणा मय मंडल ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कही। लगभग दो महीने से बालू और गिट्टी गाड़ी के धर पकड़ के कारण लगभग सिविल का सारा काम ठप्प पड़ा हुआ है। ऐसे ही लगभग दो वर्ष कोरोना संकट को झेलने के बाद जँहा एक ओर काम काजों में रफ्तार पकड़ा ही था – गरीब ठेके मजदूरों को कुछ मजदूरी मिलना मानो शुरू ही हुआ था अचानक बालू और गिट्टी का ये समस्या सामने आ गया – जिससे त्राहिमाम की स्थिति आ गई। गिट्टी और बालू के अभाव से सारा कंस्ट्रक्शन का काम बंद प्राय हो गया है – जिसके कारण जँहा एक ओर विकास की गति अवरुद्ध हो गई है वंही मजदूरों के सामने भूखमरी की स्थिति उतपन्न हो गई है। ग्रामीण क्षेत्र में गरीबों के प्रधानमंत्री आवास, अम्बेडकर आवास, शौचालय निर्माण जैसी जनहित कारी सरकार की महत्वपूर्ण योजनायें भी दम तोड़ने की स्थिति में है। – मामला चाहे जो भी हो मजदूरों को काम चाहिये मजदूरी चाहिये। समस्या का समाधान निकलना सरकार तथा प्रशासनिक पदाधिकारियों का काम है। एक ओर दिन वो दिन बढ़ती महंगाई तो दूसरी ओर बेरोजगारी – साथ ही ग्रामीण गरीब मजदूरों के कंधे में कोरोना काल का महिला समिति आदि विभिन्न जगह से लि गई ऋण/उधारी का बोझ, बीमारी, बच्चों की पढ़ाई…, – ऐसे में मरता क्या नहीं करता की स्थिति में हजारों मजदूर परिवार अगर सड़कों पर उतर जाय तो पड़ोसी मुल्क श्रीलंका की स्थिति उतपन्न होने में देर नहीं लगेगी।
पूर्व जिलापार्षद करुणा मय मंडल द्वारा सरकार एवं प्रशासन से यह अनुरोध किया गया की अविलंब सरकार उक्त बिकराल समस्या की समाधान निकाले साथ ही जिला एवं प्रखंड प्रशासन से आग्रह किये की तब तक ग्रामीण क्षेत्र की समस्याओं को देखते हुये कमसे कम छोटी गाड़ियों की पावन्दियों पर रोक हटाया जाय ताकि गरीब हित की योजनायें ससमय सम्पन्न हो सके एवं गरीब मजदूरों को रोजगार भी मिल सके।

