Breaking
Sat. Sep 19th, 2026

एमएमडीआर एक्ट को लेकर बाबूलाल मरांडी का झामुमो-कांग्रेस पर हमला, कहा- खनिज नीति से उद्योग और रोजगार प्रभावित होने का खतरा

जमशेदपुर। एमएमडीआर एक्ट को लेकर झारखंड में सियासत तेज हो गई है। राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने शनिवार को जमशेदपुर में प्रेस वार्ता कर झामुमो-कांग्रेस गठबंधन सरकार पर निशाना साधा। बिष्टुपुर स्थित तुलसी भवन के प्रयाग कक्ष में आयोजित प्रेस वार्ता में उन्होंने कहा कि एमएमडीआर एक्ट पूरे देश में लागू है, लेकिन झारखंड सरकार इसे केवल राज्य के हितों के खिलाफ उठाए गए कदम के रूप में पेश कर जनता को गुमराह कर रही है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार को केंद्र पर आरोप लगाने के बजाय खनिज संपदा के बेहतर इस्तेमाल, उद्योगों के विस्तार और रोजगार सृजन पर ध्यान देना चाहिए।

मरांडी ने कहा कि एमएमडीआर एक्ट संसद से पारित होने और राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद कानून बन चुका है। इसके प्रावधान झारखंड के साथ ओडिशा, छत्तीसगढ़ और देश के अन्य खनिज संपदा वाले राज्यों में भी लागू होंगे। उन्होंने कहा कि मेजर मिनरल्स के मामले में राज्य सरकारों द्वारा लगाए जाने वाले अतिरिक्त सेस या टैक्स का असर खनिज आधारित उद्योगों की लागत पर पड़ सकता है, जबकि लघु खनिजों पर राज्यों के अधिकार पहले की तरह बने हुए हैं।

उन्होंने झारखंड में कोयला और आयरन ओर पर लगाए गए अतिरिक्त कर का उदाहरण देते हुए कहा कि कोयले पर प्रति टन 450 रुपये और आयरन ओर पर प्रति टन 600 रुपये अतिरिक्त भार पड़ रहा है। उनके अनुसार, 30 टन कोयले की एक खेप पर 13,500 रुपये और 30 टन आयरन ओर पर 18 हजार रुपये अतिरिक्त राशि देनी पड़ती है। मरांडी ने कहा कि जमशेदपुर जैसे औद्योगिक क्षेत्र में इसका सीधा संबंध उत्पादन लागत से है। यदि झारखंड में खनिज महंगे होंगे तो उद्योग दूसरे राज्यों से सस्ता कच्चा माल खरीदने की ओर जा सकते हैं। इससे स्थानीय उद्योगों की प्रतिस्पर्धा और रोजगार पर असर पड़ने की आशंका है।

नेता प्रतिपक्ष ने खनिज राजस्व में राज्यों की हिस्सेदारी के आंकड़े भी रखे। उन्होंने दावा किया कि वर्ष 2014-15 से पहले खनिज राजस्व में राज्यों की हिस्सेदारी 60.24 प्रतिशत थी, जो वर्ष 2025-26 तक बढ़कर 88.53 प्रतिशत हो गई। इसी अवधि में केंद्र की हिस्सेदारी 39.76 प्रतिशत से घटकर 11.47 प्रतिशत रहने का दावा उन्होंने किया। मरांडी के अनुसार, वर्ष 2014-15 में देश के राज्यों को खनिजों से करीब 25 हजार करोड़ रुपये मिले थे, जबकि वर्ष 2025-26 में यह राशि बढ़कर 1,14,549 करोड़ रुपये हो गई।

उन्होंने जिला खनिज प्रतिष्ठान यानी डीएमएफ का भी उल्लेख किया। मरांडी ने कहा कि खनन प्रभावित क्षेत्रों में विकास कार्यों के लिए बनाई गई इस व्यवस्था के तहत पिछले दस वर्षों में झारखंड को 19 हजार करोड़ रुपये से अधिक प्राप्त हुए हैं। उन्होंने दावा किया कि वर्ष 2015 के बाद खदानों की नीलामी व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ी और राज्यों को रॉयल्टी तथा नीलामी प्रीमियम के रूप में बड़ी राशि प्राप्त हुई।

झारखंड में खदानों की नीलामी को लेकर मरांडी ने राज्य सरकार से सवाल किया। उन्होंने कहा कि पश्चिमी सिंहभूम के सारंडा क्षेत्र में आयरन ओर की कई खदानें लंबे समय से बंद हैं। उनका कहना था कि खदानों के बंद रहने का असर स्थानीय रोजगार, कारोबार और आर्थिक गतिविधियों पर पड़ रहा है। उन्होंने पड़ोसी ओडिशा का उदाहरण देते हुए दावा किया कि वहां 74 खदानों की नीलामी हुई, जिनमें 35 में काम शुरू हो चुका है। उनके अनुसार, वित्तीय वर्ष 2020-21 से 2025-26 के बीच ओडिशा को केवल प्रीमियम के रूप में करीब 87 हजार करोड़ रुपये प्राप्त हुए।

मरांडी ने झारखंड में अवैध खनन और खनिज परिवहन को लेकर भी आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि राज्य के विभिन्न हिस्सों में अवैध कोयला खनन, आयरन ओर के उत्खनन और परिवहन की शिकायतें सामने आती रही हैं। सारंडा क्षेत्र में भी उन्होंने अवैध आयरन ओर उत्खनन और परिवहन का आरोप लगाया। उन्होंने यह भी दावा किया कि कुछ स्पंज आयरन इकाइयों को वैध स्रोत से खनिज उपलब्ध नहीं होने के कारण अवैध माध्यम से खनिज खरीदने की स्थिति का सामना करना पड़ता है। हालांकि, इन आरोपों के समर्थन में उन्होंने प्रेस वार्ता के दौरान कोई स्वतंत्र दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किया।

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड के पास देश के कुल खनिज भंडार का करीब 40 प्रतिशत हिस्सा होने का दावा किया जाता है, लेकिन राज्य इस प्राकृतिक संपदा का अपेक्षित आर्थिक लाभ नहीं उठा पा रहा है। उन्होंने कहा कि खदानों की समय पर नीलामी, वैध खनन को बढ़ावा देने और उद्योगों के लिए अनुकूल माहौल तैयार करने से रोजगार तथा राजस्व बढ़ाने की संभावनाएं हैं।

उन्होंने झामुमो-कांग्रेस सरकार पर अपनी नाकामी छिपाने के लिए एमएमडीआर एक्ट को राजनीतिक मुद्दा बनाने का आरोप लगाया। मरांडी ने कहा कि राज्य सरकार को केंद्र पर आरोप लगाने के बजाय यह बताना चाहिए कि पिछले वर्षों में नई औद्योगिक परियोजनाओं, खनन, रोजगार और खनिज आधारित अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए उसने क्या कदम उठाए हैं। उन्होंने कहा कि झारखंड की खनिज संपदा का उपयोग पारदर्शी और नियमसम्मत तरीके से किया जाना चाहिए, ताकि राज्य को राजस्व के साथ स्थानीय लोगों को रोजगार और आर्थिक अवसर भी मिल सकें।

प्रेस वार्ता में भाजपा के जमशेदपुर महानगर अध्यक्ष संजीव सिन्हा और जिला मीडिया प्रभारी प्रेम कुमार झा समेत अन्य भाजपा नेता मौजूद थे।

Related Post