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*मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण पर चाईबासा में एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित*

चाईबासा: जिला विधिक सेवा प्राधिकार, पश्चिमी सिंहभूम चाईबासा के तत्वावधान में शनिवार को व्यवहार न्यायालय परिसर स्थित न्यायालय सभागार में मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण से संबंधित एक दिवसीय जिलास्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का आयोजन राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकार, नई दिल्ली और झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकार, रांची के निर्देशानुसार किया गया।

कार्यशाला का उद्घाटन प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकार, पश्चिमी सिंहभूम मौहम्मद शाकिर ने दीप प्रज्वलित कर किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि सड़क दुर्घटना के पीड़ितों को समय पर उचित मुआवजा दिलाना सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। कार्यशाला में विशेषज्ञों द्वारा दी जा रही जानकारी से मुआवजा प्रक्रिया को और सरल बनाने में मदद मिलेगी।

मौहम्मद शाकिर ने कहा कि मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण के मामलों में न्यायालय शुल्क मात्र 10 रुपये देय है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि ऐसे मामलों में निर्धारित समय के अनुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, ताकि पीड़ित परिवार को जल्द न्याय मिल सके।

कार्यशाला के प्रथम तकनीकी सत्र में प्रशिक्षक अधिवक्ता अमर बक्शी ने मोटर दुर्घटना कानून की धारा 166 के प्रावधानों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि पुलिस को दुर्घटना से संबंधित सभी आवश्यक दस्तावेज समय पर न्यायालय में प्रस्तुत करना चाहिए। यदि किसी कारण से दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए जा सकें तो इसकी जानकारी न्यायालय को देना आवश्यक है।

दूसरे सत्र में अधिवक्ता प्रमोद प्रसाद ने पुलिस अधिकारियों और विभिन्न विभागों के अधिकारियों को मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण के तहत अपनाई जाने वाली प्रक्रियाओं की जानकारी दी। उन्होंने दुर्घटना संबंधी सूचना रिपोर्ट और मृत्यु संबंधी सूचना रिपोर्ट तैयार करने की प्रक्रिया को विस्तार से समझाया।

अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी बहमण टूटी ने पुलिस अधिकारियों को प्राथमिकी दर्ज करने की प्रक्रिया और मोटर दुर्घटना से जुड़े मुआवजा मामलों में बरती जाने वाली सावधानियों की जानकारी दी। उन्होंने दुर्घटना संबंधी सूचना रिपोर्ट और मृत्यु संबंधी सूचना रिपोर्ट तैयार करते समय आवश्यक सावधानियों को लेकर पुलिसकर्मियों को विशेष हिदायत दी।

सदर अस्पताल के उपाध्यक्ष डॉक्टर शिवचरण हांसदा ने दुर्घटना पीड़ितों के उपचार और मुआवजा प्रक्रिया में चिकित्सकों तथा चिकित्सा प्रबंधन की भूमिका के बारे में जानकारी दी। उन्होंने दुर्घटना में मृत्यु होने की स्थिति में पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अन्य आवश्यक दस्तावेज समय पर अधिकरण के समक्ष प्रस्तुत करने पर जोर दिया, ताकि पीड़ित परिवार को मुआवजा प्राप्त करने में परेशानी न हो।

कार्यशाला का संचालन जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सचिव रवि चौधरी ने किया। मौके पर न्यायिक पदाधिकारी, अधिवक्ता, पुलिस पदाधिकारी और विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित थे।

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