चाईबासा: पश्चिमी सिंहभूम पुलिस ने मानव तस्करी के एक पुराने मामले में बड़ी सफलता हासिल करते हुए एक नाबालिग पीड़िता को सकुशल बरामद कर लिया है। साथ ही वर्ष 2023 के एक मामले में फरार चल रही नामजद अभियुक्ता रेणु तुरा को भी दिल्ली से गिरफ्तार किया गया है। इसकी जानकारी गुरुवार को अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी सदर कार्यालय, चाईबासा में आयोजित प्रेस वार्ता में अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी चक्रधरपुर डॉ. सैय्यद मुस्तफा हाशमी ने दी।
उन्होंने बताया कि अहतु थाना में 10 जुलाई 2026 को पीड़िता की मां की शिकायत पर अहतु थाना कांड संख्या 02/26 दर्ज किया गया था। मामले में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं के अलावा बाल श्रम (निषेध एवं विनियमन) संशोधन अधिनियम, 1986 की संबंधित धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू की गई।
डॉ. सैय्यद मुस्तफा हाशमी के निर्देशन में विशेष छापामारी दल का गठन किया गया। टीम 29 जुलाई 2026 को दिल्ली रवाना हुई और लगातार प्रयास के बाद 3 अगस्त 2026 को पीड़िता को सकुशल बरामद कर चाईबासा लाई। इसके बाद पीड़िता का चिकित्सीय परीक्षण सदर अस्पताल, चाईबासा में कराया गया तथा आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करते हुए उसे बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी), चाईबासा के समक्ष प्रस्तुत किया गया। मामले की आगे की जांच जारी है।
इसी अभियान के दौरान अहतु थाना कांड संख्या 01/23 (दिनांक 19 मई 2023) की नामजद अभियुक्ता रेणु तुरा, पति लखबीर सिंह, निवासी सेक्टर-6, रोहिणी, दिल्ली को भी गिरफ्तार किया गया। उसके खिलाफ चाईबासा न्यायालय से कुर्की वारंट जारी था। पुलिस ने विधिसम्मत कार्रवाई के बाद 3 अगस्त 2026 को उसे न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया।
पुलिस के अनुसार रेणु तुरा के विरुद्ध चाईबासा के अलावा देहरादून और दिल्ली के विभिन्न थानों में मानव तस्करी, धोखाधड़ी, धमकी, पॉक्सो एक्ट तथा जेजे एक्ट से जुड़े कई गंभीर मामले दर्ज हैं।
इस अभियान में अनुसंधानकर्ता पुनीत उरांव के नेतृत्व में सुमन टुडू, दुबराज हेम्ब्रम, हरिश्चंद्र प्रसाद, महिला आरक्षी जसिन्ता मिंज, महान्ती कुँवर, चिन्ता बोदरा तथा अन्य पुलिसकर्मियों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

