जमशेदपुर। जमशेदपुर पश्चिम के विधायक सरयू राय ने मानगो नगर निगम द्वारा नगर निगम चुनाव से पहले जारी की गई डेढ़ दर्जन से अधिक निविदाओं को बिना कोई कारण बताए रद्द किए जाने पर कड़ी आपत्ति जताई है। शुक्रवार को जारी बयान में उन्होंने कहा कि यह निर्णय लोक निर्माण संहिता (पीडब्ल्यूडी कोड) के प्रावधानों के विपरीत है और इस मामले में जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए।
सरयू राय ने कहा कि निविदा निष्पादन की पूरी प्रक्रिया लोक निर्माण संहिता के अनुसार संचालित होती है, जिसका पालन सभी सरकारी विभागों और नगर निकायों के लिए अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि नियमों के अनुसार सबसे कम दर यानी एल-1 निविदादाता का चयन किया जाता है और उसे स्वीकृति पत्र जारी किया जाता है। यदि निर्धारित अवधि में वह कार्य प्रारंभ करने के लिए अनुबंध नहीं करता है तो उसे नियमानुसार दो बार स्मरण पत्र भेजा जाता है। इसके बाद भी अनुबंध नहीं होने पर उसकी जमा राशि जब्त कर दूसरे स्थान पर रहे एल-2 निविदादाता से वार्ता की जाती है। यदि वह एल-1 की दर पर कार्य करने को तैयार हो जाता है, तभी उसे कार्य दिया जाता है, अन्यथा निविदा रद्द करने की प्रक्रिया अपनाई जाती है।
उन्होंने आरोप लगाया कि मानगो नगर निगम ने इस पूरी प्रक्रिया का पालन किए बिना ही कई निविदाओं को रद्द कर दिया। इतना ही नहीं, जिन निविदादाताओं ने अनुबंध कर लिया था और निर्धारित अग्रिम राशि भी जमा कर दी थी, उनकी निविदाएं भी निरस्त कर दी गईं। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसी जानकारियां मिल रही हैं कि जिन कार्यों को तकनीकी अथवा प्रशासनिक स्वीकृति नहीं मिली थी और जो प्रक्रिया में थे, उन्हें भी रद्द किया जा रहा है या रद्द करने की कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
सरयू राय ने कहा कि किसी वरिष्ठ लोकसेवक द्वारा इस प्रकार का निर्णय लिया जाना गंभीर चिंता का विषय है। उनके अनुसार इससे संबंधित अधिकारियों की कार्यप्रणाली और प्रशासनिक क्षमता पर सवाल खड़े होते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसा तभी संभव है जब निर्णय के पीछे किसी प्रकार का निहित स्वार्थ हो या फिर किसी दबाव में कार्रवाई की गई हो। दोनों ही स्थितियों में संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध विधिसम्मत कार्रवाई की जानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि निविदा प्रक्रिया में लोक निर्माण संहिता के प्रावधानों की अनदेखी या उल्लंघन गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है। उन्होंने घोषणा की कि वह इस पूरे मामले को विधानसभा के आगामी सत्र में प्रमुखता से उठाएंगे और सरकार से मांग करेंगे कि जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की जांच कर उनके विरुद्ध कानून के अनुसार कार्रवाई की जाए।

